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Trial By Fire: रिलीज से पहले मुश्किल में पड़ी 'ट्रायल बाई फायर', सुशील अंसल ने हाईकोर्ट में दायर की याचिक

Tue, 10 Jan 2023 09:55 PM IST
पलक शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: पलक शुक्ला Updated Tue, 10 Jan 2023 09:55 PM IST
सार

साल 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में सजायाफ्ता रियल एस्टेट कारोबारी सुशील अंसल ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर वेब सीरीज 'ट्रायल बाई फायर' की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की।

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ट्रायल बाय फायर - फोटो : इंस्टाग्राम

विस्तार

दिल्ली में आज तक के सबसे खौफनाक अग्निकांड की कहानी को दुनिया के सामने लाने के लिए तैयार वेब सीरीज 'ट्रायल बाई फायर' अपनी रिलीज से पहले ही विवादों में फंस गई है। दरअसल, साल 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में सजायाफ्ता रियल एस्टेट कारोबारी सुशील अंसल ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर वेब सीरीज 'ट्रायल बाई फायर' की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की। यह वेब सीरीज 13 जनवरी को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है।

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दिल्ली हाई कोर्ट में इस याचिका की सुनवाई 11 जनवरी को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के समक्ष की जाएगी। आपको बता दें, 83 साल के रियल एस्टेट कारोबारी सुशील अंसल ने वेब सीरीज से पहले इस कांड पर आधारित किताब 'ट्रायल बाई फायर- द ट्रेजिक टेल ऑफ द उपहार ट्रेजडी' के प्रसार और प्रकाशन पर भी रोक लगाने की मांग की थी। 
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सुशील अंसल ने अपनी दलील में कहा कि उन्हें 'कानूनी और सामाजिक रूप से दंडित किया गया है' है और सीरीज की रिलीज, जिसे एक दंपति द्वारा लिखी गई किताब पर आधारित बताया गया है, जिन्होंने अपने दो बच्चों को आग में खो दिया, इससे अपूरणीय क्षति होगी। उसकी प्रतिष्ठा और निजता के उसके अधिकार का उल्लंघन। 13 जून, 1997 को उपहार सिनेमा में हिंदी फिल्म 'बॉर्डर' की स्क्रीनिंग के दौरान भीषण आग लग गई थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी।
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साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार मामले का फैसला किया और अब 83 वर्षीय सुशील अंसल और उनके भाई गोपाल अंसल  को 30-30 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने तब सुशील अंसल को जेल में बिताए ध्यान में रखते हुए रिहा कर दिया था। अंसल ब्रदर्स और दो अन्य को बाद में उपहार सिनेमा फायर ट्रायल से संबंधित सबूतों के साथ छेड़छाड़ का दोषी ठहराया गया था।
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