Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Review: 42 साल का कुंवारा वैलेंटाइन, रोबोट संग बिताई रात, फिर पोल खुली तो..
ओटीटी पर ‘लव स्टोरियां’ आने वाली हैं। पड़ोस वाले घर में कोई कुमार गौरव और विजेयता पंडित की ‘लव स्टोरी’ का गाना सुन रहा है। और, मैं लिख रहा हूं एक ऐसी लव स्टोरी की फिल्म समीक्षा जिसमें हीरोइन के नाम पर एक रोबोट है। उसका प्यार है, उसका इकरार है, और उसका बदला भी है। क्लाइमेक्स फिल्म का ऐसा हत्थे से उखड़ा हुआ है कि फिल्म बनाने वालों को फायर ब्रिगेड बनाकर जान्हवी कपूर को लाना होता है। इरादा फिल्म की सीक्वल का भी है, लेकिन पहले देख लेते हैं कि इस सफर का पहला पड़ाव निर्माता दिनेश विजन और इसकी निर्देशक जोड़ी ने कैसा पार किया है? ये सच है कि तकनीक और खासतौर से कृत्रिम मेधा (एआई) ने मानव जीवन पर असर डालना शुरू कर दिया है। लंबे समय से विकसित की जा रही इस तकनीक का बौर रोबोट घरेलू और कारोबारी कामों में मदद के लिए इस्तेमाल होने भी लगा है। लेकिन, क्या हो अगर कोई 42 साल का बच्चा एक ऐसी रोबोट पर मोहित हो जाए जिसे उसकी मौसी ने घरेलू कामकाज में मदद के लिए तैयार किया है।
मौसी ने भतीजे को दिला दी रोबोट बहू
मौसी का विचार अच्छा है। वह अपने भतीजे को भारत से अमेरिका बुलाती है। भतीजा आते ही घर में काम करने वाली पर फिदा हो जाता है। इंसानी फितरत इधर पाताल में जाती है। उधर, मौसी का गुरूर है कि उनके भतीजे ने एक रोबोट के साथ ‘रात’ बिता ली और उसे पता भी नहीं चला कि वह रोबोट है। फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ एक अद्भुत विचार है, इस विचार पर बनी एक अच्छी फिल्म एक नई बहस की शुरुआत कर सकती थी लेकिन जैसे रोबोट अगर खराब हो जाए, उसकी आंतरिक व्यवस्था में कोई खामी आ जाए या वह अपने प्रशासक (एडमिन) के निर्देश मानने से ही मना कर दे, तो कुछ भी हो सकता है। वैसे ही इस फिल्म में कभी भी कुछ भी होता रहता है।
मैडॉक और जियो की लव स्टोरी
कृत्रिम मेधा तक तो फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ नहीं पहुंचती लेकिन इसे बनाने वालों की मेधा जरूर इस फिल्म में अपना इम्तिहान देती दिखती है। जियो स्टूडियोज के पास अथाह पैसा है। उनके एप जियो सिनेमा को लगातार कुछ नया दिखाने के लिए फिल्में, वेब सीरीज और भी बहुत कुछ चाहिए। विदेश से उन्हें अच्छी फिल्में व वेब सीरीज मिल भी गई हैं। लेकिन, हिंदी सिनेमा का क्या करें, जहां उनको सबसे मेधावी निर्माता अब तक दिनेश विजन ही मिले हैं। मैडॉक फिल्म्स एक तरह से जियो स्टूडियोज का फुलटाइम वेंडर बन चुका है और समझौता जो भी हुआ हो लेकिन जियो का अपना घरेलू स्टूडियो वॉयकॉम18 भी कम हवा में इन दिनों नही हैं।
साल की पहली मेगास्टार पकाऊ फिल्म
फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ इस साल की पहली मेगास्टार पकाऊ फिल्म है। 2019 में ‘कबीर सिंह’ से जो कुछ शाहिद कपूर ने कमाया था, उसे वह अपनी ‘फर्जी’ जैसी सीरीज और ‘जर्सी’ जैसी फिल्म में गंवा चुके हैं। अली अब्बास जफर की फिल्म ‘ब्लडी डैडी’ बढ़िया थी, लेकिन वह ओटीटी पर रिलीज हो गई। अब फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में शाहिद कपूर फिर से इकन्ना एक पढ़ रहे हैं। उनकी जोड़ीदार कृति सेनन का तो कहना ही क्या? मौजूदा दौर की वह इकलौती हीरोइन हैं, लाइन से आधा दर्जन फ्लॉप फिल्में पिछले दो साल में दे चुकी हैं। फ्लॉप की डबल हैट्रिक लगा चुकी कृति का भी फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में शाहिद के साथ इम्तिहान है। और, वह भी एक ऐसी कहानी में है जिसमें दर्शकों के देखने लायक कुछ खास है नहीं।
खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से
आनंद बक्षी 50 साल पहले लिख चुके हैं, सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से, के खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से....! नवोदित निर्देशक जोड़ी अमित जोशी और आराधना शाह ने अपनी पहली फिल्म के लिए बहुत ही बनावटी फिल्म लिखी है। जाहिर है दोनों ने जब ये आइडिया क्रैक किया होगा तो दोनों उछल पड़े होंगे कि वाह! क्या कमाल फिल्म बनेगी इस पर। लेकिन, निर्माता दिनेश विजन की सिनेमाई समझ का सेंसेक्स इधर लगातार लाल निशान पर ही बंद हो रहा है। वह विचार पर फोकस रखते हैं, फिल्म पर नहीं। फिल्म उनको बनानी है। हीरोइन कृति सेनन को लेना है। बाकी काम लक्ष्मण उतेकर के हवाले है। वह भी अब कैमरा ही संभालने में लगे रहते हैं।
42 के शाहिद और लवर बॉय, उफ्फ!
फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ मन को भरमाने वाली फिल्म है। अगर, आपके इसके रंग बिरंगे प्रोडक्शन डिजाइन के चटक रंगों के साथ बह गए तो आपके साथ खेल हो सकता है। क्योंकि लक्ष्मण उतेकर ने अपने कैमरे के जरिये फ्रेम सजाकर काम तो कमाल का किया है। लेकिन दर्शकों को अपनी तरफ खींच लाने का इस फिल्म में माद्दा नहीं है। शाहिद कपूर की आंखों के पास पड़ने लगीं झुर्रियां उन्हें ऐसी प्रेम कहानियों के लिए कब का अनफिट बना चुकी हैं। डांस एक्सपर्ट माने जाने वाले शाहिद से अब डांस भी नहीं होता। डांस देखना हो तो उनके छोटे भाई ईशान का फिल्म ‘पिप्पा’ का गाना ‘मैं मरजाना..’ देखिए। ईशान ही इस फिल्म के लिए सही च्वाइस भी होते। हाथी और चींटी वाले घटिया जोक सुनाकर निर्देशकों की ये नई जोड़ी अपनी मेधा का स्तर भी दर्शकों के सामने खोलती रहती है।
TBMAUJ Screening: सितारों ने उठाया फिल्म तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया का लुत्फ, स्वैग में दिखे शाहिद-कृति
लेखन, निर्देशन, अभिनय सब बातों में उलझा
लेखन और निर्देशन में पूरी तरह फेल ये फिल्म अभिनय विभाग में भी पूरी तरह फेल है। आधी फिल्म तक तो यूं लगता रहता है जैसे शाहिद अपने ही घर में चहलकदमी कर रहे हैं। ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ जैसे हावभाव शाहिद के चेहरे के स्थायी भाव बन चुके हैं। इन स्थायी भावों ने ही ‘कबीर सिंह’ हिट कराई थी लेकिन एक लव स्टोरी? ना बाबा ना..! उसके लिए दिनेश विजन को अपनी नजर नई खेप के नए सितारों पर जमानी चाहिए। काम कृति सेनन का भी फिल्म में बहुत अच्छा नहीं है। सिर्फ माधुरी दीक्षित के हिट गाने ‘धक धक करने लगा..’ के मुखड़े पर उनका डांस ही ये संतोष देता है कि फिल्म देखना बिल्कुल बेकार नहीं गया। कई बार तो ये भी लगता है कि कृति सेनन की एक्टिंग देखकर ही अमित और आराधना ने उनके लिए रोबोट के किरदार वाली ये फिल्म लिखी होगी।