Javed Akhtar: जावेद अख्तर ने लोगों को दिखाया आईना, बोले- अब सिनेमा देखने वालों पर है बड़ी जिम्मेदारी
मशहूर लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ने नौवें अजंता-एलोरा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में कहा कि आज की फिल्मों के किरदार राजनीतिक विषयों या सामाजिक मुद्दों से जुड़े हुए नहीं होते, बल्कि खुद के किस्से-कहानियों और अनुभवों के बारे में ज्यादा होते हैं।
विस्तार
हिंदी सिनेमा के दिग्गज और मशहूर लेखक-गीतकार जावेद अख्तर अपनी रचनाओं के अलावा अपनी बातों को बेबाकी से कहने के लिए भी जाने जाते हैं। समाज और देश से जुड़े कई विषयों पर जावेद अख्तर अक्सर अपनी राय लोगों से साझा करते हैं। शनिवार को जावेद अख्तर नौवें अजंता-एलोरा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भाषा को भारत की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
भारत की आत्मा अमर है
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जावेद अख्तर ने कहा, 'भाषा भारत की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन जो लोग इसका महत्व नहीं समझते, वे इसके बारे में निर्णय ले रहे हैं। भारत की आत्मा अमर है इसे कोई भी नष्ट नहीं कर सकता है, हिंदुस्तान की सच्ची भावना और देश की संस्कृति को कुछ मुट्ठी भर लोग नहीं बदल सकते। लोग आएंगे और जाएंगे, लेकिन देश की संस्कृति हमेशा वही रहेगी।'
Ira Nupur Wedding: उदयपुर में मिनी ड्रेस में नजर आईं आयरा, पत्नी के लिए स्पेशल गाना गाते दिखे नूपुर शिकरे
सामाजिक मुद्दों से जुड़े हुए नहीं होते आज के किरदार
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आज की फिल्मों के किरदार राजनीतिक विषयों या सामाजिक मुद्दों से जुड़े हुए नहीं होते, बल्कि खुद के किस्से-कहानियों और अनुभवों के बारे में ज्यादा होते हैं। उन्होंने आगे कहा, '60 और 70 के दशक में हिंदी फिल्मों के हीरो को साधारण पृष्ठभूमि का दिखाया जाता था, जिनमें मजदूर, टीचर, टैक्सी चालक या रिक्शा चालक तक शामिल होते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। आज के हीरो अमीर परिवारों से आते हैं। उन्हें देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति से कोई लेना-देना नहीं होता।'
Bollywood Stars: ऑनलाइन ठगी के मामलों में इन सितारों को लगी लाखों की चपत, लिस्ट में कई कलाकारों के नाम शामिल
आपको तय कना होगा कि कैसी फिल्म बनेगी
जावेद अख्तर ने 'एनिमल' और 'चोली के पीछे क्या है' गाने का उदाहरण देते हुए कहा, 'आज के समय में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सिनेमा बनाने वालों से ज्यादा सिनेमा देखने वालों पर हैं' क्योंकि अगर किसी फिल्म में हीरो किसी महिला से अपने जूते चाटने को कहे और वो फिल्म सुपरहिट हो जाए तो ये बड़ी खतरनाक बात है। वहीं, 'चोली के पीछे क्या है' गाने को लेकर जावेद ने कहा, 'इस गाने को 8-10 लोगों ने मिलकर बनाया, लेकिन ये गाना समाज में सुपरहिट हो गया। ये करोड़ो लोगो को अच्छा लगा था। ये बहुत डरावनी बात है। ये आप लोगों को तय करना होगा कि कैसी फिल्में बनेगी और कैसी फिल्में देखी जानी चाहिए'। जावेद अख्तर के अलावा इस महोत्सव में फिल्म निर्माता जयप्रद देसाई, आर बाल्की, अनुभव सिन्हा भी नजर आए।
Panchak: माधुरी ने साझा किया 'पंचक' में पति श्रीराम नेने के साथ काम करने का अनुभव, बोलीं- हमने काम बांट लिए