विश्व फोटोग्राफी दिवस 2020: लतिका ने सुनाई इस अवॉर्ड विनिंग फोटो की दास्तां, किस्सा बाघ से भिड़ंत का
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विश्व फोटोग्राफी दिवस पर सोनी बीबीसी अर्थ के प्रतिष्ठित भारतीय वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स से अमर उजाला ने बातचीत की और उनसे हासिल कीं कुछ बेहतरीन तस्वीरें, जो उनके कैमरे के ज़रिए प्रकृति की सबसे रहस्यमयी कहानियां बयां करतीं हैं। इसकी आखिरी कड़ी में बात लतिका नाथ से। लतिका नाथ एक भारतीय लेखिका, फोटोग्राफर और वन्य-जीव संरक्षक हैं।
सुना है आपने जान हथेली पर रखकर एक बार चिम्पांजियों का पीछा किया था?
जेन गुडाल के 80वें जन्मदिन के मौके पर हम लोग गोम्बे में थे। यह मेरे लिए एक सपना था- मेरे लिए चिम्पांजी हॉलीवुड के सितारों की तरह हैं। मैंने उनके बारे में पढ़ा है, उन पर फिल्में देखी हैं और यह सेलिब्रिटीज को मिलने की तरह था। तंगान्यीका झील के पार बोट में बैठकर हम लोग पार्क के प्रवेश की ओर रवाना हुए। कैमरे से भरे बैकपैक के साथ चिम्पांजी की खोज में हम पर्वत की ओर बढ़ने लगे। 45 मिनट चलने के बाद हमें चिम्पांजी का एक झुंड रास्ते पर बैठा हुआ दिखाई दिया।
तो आप लोगों की प्रतिक्रिया क्या रही उन्हें देखकर?
यह एक बड़ा झुंड था और वे एक-दूसरे के साथ जानने की कोशिश कर रहे थे, संवाद साध रहे थे, जबकि हम खुश होकर पूरा नजारा देख रहे थे। पहली प्रतिक्रिया तो उनकी तरफ से हुई। अचानक, उनके समूह के एक सदस्य के संकेत पर वे सभी उठ खड़े हुए और रास्ते से दूर जाते हुए घनी झाडियों में चले गए।
फिर आपके दल ने क्या किया?
हमारे गाइड ने उनका पीछा करने का संकेत दिया और हम लोग सबसे घने छोटे जंगल में जाने लगे जहां कुछ भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। मैं अंदर जाते हुए सोच रही थी कि हमें कुछ समय तक उनका पीछा करना होगा और वे सब एक बार फिर कहीं इकठ्ठा हो जाएंगे और हमें उनके साथ कुछ और समय मिल जाएगा। जल्द ही मुझे महसूस हुआ कि भले ही हम लोग उन्हें सुन सकते थे लेकिन देख नहीं पा रहे थे। हमारे गाइड के पीछे हम लोग जाने लगे और पहाड़ पर चढ़ना शुरू किया। आगे जाने के लिए हमें लेटकर घनी झाड़ियों के बीच छोटी सुरंगों में से एक सांप की तरह रेंगना पड़ा और ढलान ज्यादा तीव्र होती गई।
आपको डर तो लगा होगा?
हां, क्योंकि इस बीच चिम्पांजियों ने शिकार करने का फैसला किया और पूरा वातावरण डरावनी चीखों और आवाजों से भर गया। एक घंटे के बाद जटाओं-लताओं पर लटकते हुए और उनका इस्तेमाल कर खड़े रहते हुए हम पहाड़ के एक तिहाई रास्ते तक पहुंच चुके थे। मैंने नीचे की ओर देखा और मुझे महसूस हुआ कि हम एक बड़ी और सीधी चट्टान पर खड़े हुए थे, नीचे की ओर जाने का कोई रास्ता नहीं था। हम किसी भी स्थिर चीज पर अपना पैर नहीं टिका सकते थे। हम लोग फिसल या गिर गए होते तो हमें आसानी से ढूंढा भी नहीं जा सकता था। कुछ और घंटों की कठिन चढ़ाई के बाद हम लोग सबसे ऊंचाई पर पहुंच गए। और वहां एक समूह बैठा हुआ था जिसे देखकर हमारी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। वे लोग थोड़ा चले, हमारे सभी ओर बैठ गए और हमें उनके साथ कुछ शानदार समय बिताने का मौका मिला। पुरस्कार जीतने वाले इस बेबी चिम्पांजी की तस्वीर उसी दिन ली गई थी !
और, देश में कभी ऐसा कुछ ऐसा हुआ जो आज भी न भूलता हो?
एक जीव विज्ञानी और एक संरक्षक फोटोग्राफर के तौर पर काम करते हुए मुझ पर हमला किए जाने की घटना कई बार हुई है। एक समय जब मैं अपनी पीएचडी के लिए शोध कर रही थी और मुझे बांधवगढ़ नेशनल पार्क (राष्ट्रीय अभयारण्य) में पैदल जाने की अनुमति दी गई थी, मैं बाघों की पहचान और निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप का इस्तेमाल कर रही थी। क्योंकि मुझे पार्क से जुड़ी अंदरुनी जानकारी थी। मैं पानी के गढ्ढों या पगडंडियों पर कैमरा ट्रैप लगाती थी जहां मुझे बाघों के बार बार आने के बारे में पता था। हमने सुना था कि जंगल में एक नई बाघिन है।
उस दिन आप वहां क्या करने गईं थीं?
मैं किसी भी तरह उस बाघिन की तस्वीर हासिल करना चाहती थी। हम नदी के ताल में स्थित एक पानी के गढ्ढे की तरफ गए जहां मुझे उम्मीद थी कि वह आएगी। जब हम कैमरा ट्रैप लगाने का काम पूरा कर रहे थे, करीब करीब अंधेरा हो गया था और हमें अचानक खतरे की घंटी सुनाई देने लगी। हमें महसूस हुआ कि एक बाघ आ रहा था। मेरे सहायक और मैंने जल्दी से अपना काम पूरा किया और नाले से दूर जहांहमारी गाड़ी खड़ी की गई थी उस दिशा में सडक की ओर तेजी से बढ़ने लगे। जैसे ही हम नाले से बाहर आए और चलना शुरू किया, रास्ते के बाजू से बाघ सामने आ गया।
फिर क्या हुआ?
मुझे नहीं पता कौन ज्यादा चौंका या डर गया, मैं या वो बाघ। सौभाग्य से उसके जबड़े में एक हिरण था जिसका उसने अभी शिकार किया था। बाघ मुझसे तीन फीट से भी कम दूरी पर था। उसने मुंह में हिरण पकड़े पकड़े मेरी तरफ गोल आंखों से घूरकर देखा। मैं वहीं पर जम गई थी। और फिर मैंने धीरे धीरे छोटे कदमों से पीछे की ओर चलना शुरू किया। मेरे सहायकों ने भी वही किया। हम पीछे की ओर दूर चले गए तब तक बाघ भी पीछे नहीं मुड़ा। हमने घूमकर दूसरा रास्ता पकड़ा और हमारी कार तक पहुंचे। बाद में उसी दिन शाम को पानी के गढ्ढे के पास हम शावक के साथ नई बाघिन की तस्वीर ले पाने में सफल रहे।
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