{"_id":"64e8c4c50da81e1c530b66e3","slug":"famous-film-editor-sanjay-verma-passed-away-he-had-won-filmfare-award-for-kaho-naa-pyaar-hai-2023-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुखद: मशहूर फिल्म एडिटर संजय वर्मा का निधन, 'कहो ना प्यार है' के लिए जीता था फिल्मफेयर पुरस्कार","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
दुखद: मशहूर फिल्म एडिटर संजय वर्मा का निधन, 'कहो ना प्यार है' के लिए जीता था फिल्मफेयर पुरस्कार
Fri, 25 Aug 2023 08:42 PM IST
साक्षी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: साक्षी
Updated Fri, 25 Aug 2023 08:42 PM IST
सार
हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्म एडिटर संजय वर्मा का निधन हो गया है। वह राकेश रोशन के पसंदीदा संपादक थे।
विज्ञापन
संजय वर्मा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विस्तार
हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्म एडिटर संजय वर्मा का निधन हो गया है। वह राकेश रोशन के पसंदीदा संपादक थे। उन्होंने 'खून भरी मांग', 'कोई मिल गया' और 'कहो ना प्यार है' जैसी कई सुपरहिट फिल्मों का संपादन किया था। संजय वर्मा ने 'कहो ना प्यार है' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता था।
Jawan: 'मनी हाइस्ट' से प्रेरित है शाहरुख की 'जवान'? लंबे समय से उठ रही अफवाहों पर मुकेश छाबड़ा ने दिया जवाब
कई बेहतरीन फिल्मों के संपादक रहे संजय
संजय वर्मा के निधन की खबर के बाद से इंडस्ट्री में गम का माहौल है। यह हिंदी सिनेमा के लिए क्षतिपूर्ण स्थिति है। संजय एक संपादक के साथ-साथ सहायक संपादक और साउंड डिजाइनर भी थे। उन्होंने अपने करियर में कई फिल्मों में काम किया था, जिनमें साल 1995 में आई 'करण अर्जुन', 2001 में आई 'रहना है तेरे दिल में', साल 2000 की 'मिशन कश्मीर' और साल 1997 में आई 'कौन सच्चा कौन झूठा' सहित कई अन्य फिल्में भी शामिल हैं।
विज्ञापन
Milind Safai: कैंसर से जिंदगी की जंग हार गए मिलिंद सफई, 53 साल की उम्र में मराठी अभिनेता ने ली अंतिम सांस
कई फिल्मों के लिए पुरस्कार भी मिले
इसके साथ ही संजय वर्मा ने अपने करियर में कई पुरस्कार भी अपने नाम किए। उन्होंने साल 1996 में फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था। इसके अलावा उन्होंने साल 2000 में स्क्रीन अवॉर्ड्स और 2001 में IIFA अवॉर्ड सहित कई पुरस्कार जीते थे। संजय ने 2017 में रिलीज हुई फिल्म 'कौन मेरा कौन तेरा' और 2019 की राजेश ए बब्बर के जरिए निर्देशित फिल्म 'छोरियां छोरों से कम नहीं होती' का भी संपादन किया था।
69th National Awards: 'द कश्मीर फाइल्स' को अवॉर्ड मिलने पर भी दुखी हैं अनुपम खेर? इस कारण जूरी पर साधा निशाना
विज्ञापन
Jawan: 'मनी हाइस्ट' से प्रेरित है शाहरुख की 'जवान'? लंबे समय से उठ रही अफवाहों पर मुकेश छाबड़ा ने दिया जवाब
विज्ञापन
कई बेहतरीन फिल्मों के संपादक रहे संजय
संजय वर्मा के निधन की खबर के बाद से इंडस्ट्री में गम का माहौल है। यह हिंदी सिनेमा के लिए क्षतिपूर्ण स्थिति है। संजय एक संपादक के साथ-साथ सहायक संपादक और साउंड डिजाइनर भी थे। उन्होंने अपने करियर में कई फिल्मों में काम किया था, जिनमें साल 1995 में आई 'करण अर्जुन', 2001 में आई 'रहना है तेरे दिल में', साल 2000 की 'मिशन कश्मीर' और साल 1997 में आई 'कौन सच्चा कौन झूठा' सहित कई अन्य फिल्में भी शामिल हैं।
विज्ञापन
Milind Safai: कैंसर से जिंदगी की जंग हार गए मिलिंद सफई, 53 साल की उम्र में मराठी अभिनेता ने ली अंतिम सांस
कई फिल्मों के लिए पुरस्कार भी मिले
इसके साथ ही संजय वर्मा ने अपने करियर में कई पुरस्कार भी अपने नाम किए। उन्होंने साल 1996 में फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था। इसके अलावा उन्होंने साल 2000 में स्क्रीन अवॉर्ड्स और 2001 में IIFA अवॉर्ड सहित कई पुरस्कार जीते थे। संजय ने 2017 में रिलीज हुई फिल्म 'कौन मेरा कौन तेरा' और 2019 की राजेश ए बब्बर के जरिए निर्देशित फिल्म 'छोरियां छोरों से कम नहीं होती' का भी संपादन किया था।
69th National Awards: 'द कश्मीर फाइल्स' को अवॉर्ड मिलने पर भी दुखी हैं अनुपम खेर? इस कारण जूरी पर साधा निशाना