{"_id":"64bc50eed3df93ad880cb4e3","slug":"two-crore-compensation-on-tehelka-in-a-bribery-case-2023-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi : सेना के अफसर पर 22 साल पहले लगाया था रिश्वत लेने का आरोप, अब तहलका को देना होगा दो करोड़ का हर्जाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi : सेना के अफसर पर 22 साल पहले लगाया था रिश्वत लेने का आरोप, अब तहलका को देना होगा दो करोड़ का हर्जाना
Sun, 23 Jul 2023 03:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 23 Jul 2023 03:28 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा, पोर्टल ने 2001 में रक्षा खरीद के लिए उन पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा नष्ट हुई।
विज्ञापन
delhi high court
- फोटो : ANI
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूज पोर्टल तहलका, इसके मालिक तरुण तेजपाल और दो पत्रकारों को आदेश दिया है कि वे मेजर जनरल एमएस अहलूवालिया को मानहानि के लिए दो करोड़ रुपये हर्जाना दें। कोर्ट ने कहा, पोर्टल ने 2001 में रक्षा खरीद के लिए उन पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा नष्ट हुई। एक ईमानदार अधिकारी की मानहानि का इससे खुला और साफ मामला नहीं हो सकता। प्रकाशक इसके लिए आज 23 साल बाद माफी मांग रहे हैं, जो न केवल नाकाफी, बल्कि अर्थहीन भी है।
विज्ञापन
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि याची की प्रतिष्ठा न सिर्फ जनता के बीच कम हुई, बल्कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से उसका चरित्र जिस तरह धूमिल किया गया, उसकी कभी भरपाई नहीं हो सकती। इसके लिए दो करोड़ की हर्जाना राशि तहलका डॉट कॉम, इसकी मालिकाना कंपनी मैसर्स बफेलो कम्युनिकेशंस, इसके मालिक तरुण तेजपाल और दो पत्रकार अनिरुद्ध बहल व मैथ्यू सैमुअल चुकाएंगे। मामले के अन्य आरोपियों जी टेलीफिल्म और उसके अधिकारियों को अदालत ने राहत देते हुए कहा कि उन्होंने न्यूज पोर्टल से हुए समझौते के तहत संबंधित खबर प्रसारित की थी।
विज्ञापन
ये भी की टिप्पणी
अब्राहम लिंकन के कथन का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा, झूठे आरोपों के खिलाफ सत्य ही सबसे अच्छा दोष-निवारक है, लेकिन किसी बात पर तुरंत निर्णय करने वाले समाज की नजरों में खोई प्रतिष्ठा सत्य भी नहीं लौटा सकता।
विज्ञापन
आरोपों पर हुई जांच
कोर्ट ने कहा कि आरोपों की वजह से अधिकारी के खिलाफ सेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी शुरू करवाई। हालांकि, इसमें माना गया कि उन्होंने कोई दुराचरण नहीं किया, लेकिन उनके खिलाफ ‘गंभीर नाराजगी’ भी जताई गई। वहीं, पत्रकार अनिरुद्ध बहल ने रिपोर्ट में जो टिप्पणियां जोड़ीं, वे झूठी और अपमानजनक थीं। यह सब ऐसे अधिकारी के खिलाफ हुआ, जिसने बचाव पक्ष के तमाम प्रयासों के बावजूद कभी भी रिश्वत नहीं ली।