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विदेशियों को ठगने वाले तीन कॉल सेंटरों का खुलासा, 37 लोग गिरफ्तार

Wed, 24 Mar 2021 01:52 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 24 Mar 2021 01:52 AM IST
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Three call centers busting foreigners revealed, 37 arrested
नई दिल्ली। पुलिस की साइबर सेल ने तीन कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर 37 ठगों को गिरफ्तार किया है। ये तीन तरीकों से अब तक विदेशियों से करीब 15 करोड़ रुपये से ज्यादा हड़प चुके हैं। दो कॉल सेंटर जनकपुरी की एक ही बिल्डिंग में और जबकि तीसरा बिंदापुर में चल रहा था। आरोपी फर्जी कॉल सेंटर के जरिये विदेशियों को सोशल सिक्योरिटी नंबर, सपोर्ट और तकनीकी सपोर्ट व एंटीवायरस सपोर्ट आदि के नाम पर ठग रहे थे। तीनों कॉल सेंटर करीब आठ-नौ महीने से चल रहे थे। जनकपुरी के दोनों कॉल सेंटर का मालिक एक ही है।
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साइबर सेल डीसीपी अन्येष राय के अनुसार, बिंदापुर व जनकपुरी में कॉल सेंटर से विदेशियों को ठगने की सूचना के बाद इंस्पेक्टर सज्जन सिंह, प्रवीण, एसआई अवधेश व पवन आदि की टीम ने छापेमारी की। वहां काम कर रहे मैनेजर, टीम लीडर और कॉल सेंटर ऑपरेटर समेत कुल 37 लोगो को गिरफ्तार किया गया। जनकपुरी के दोनों कॉल सेंटर से 28 और बिंदापुर के कॉल सेंटर से नौ आरोपी गिरफ्तार किए गए। यहां से 56 डेस्कटॉप और 41 फोन जब्त किए गए।
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अधिकारियों के अनुसार, पुलिस की नजर से बचने के लिए जनकपुरी के असालतपुर गांव में एक ही मकान में दो कॉल सेंटर खोले गए थे। जांच में पता चला कि अब तक ये विदेशियों से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा ठग चुके हैं। बिंदापुर वाला कॉल सेंटर अमेरिका व कनाडा के लोगों से 10 करोड़ रुपये से ज्यादा ठग चुका है। यहां काम करने वाले लोगों को ठगी के लिए बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता था। उनसे अमेरिकी लहजे में अंग्रेजी बोलने के लिए कहा जाता था। यहां मैनेजर को एक लाख, टीम लीडर को 75 हजार और टेली कॉलर को 30 हजार रुपये प्रतिमाह सैलरी दी जाती थी।
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सोशल सिक्योरिटी नंबर स्कैम
कॉल सेंटर कर्मी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी के अधिकारी बनकर अमेरिकी लोगों से संपर्क करते और कहते कि उनके सिक्योरिटी नंबर से जुड़े बैंक खाते से ड्रग्स माफिया को लेन-देन हुआ है। अमेरिका में सिक्योरिटी नंबर भारत के आधार की तरह होता है और उसे बैंक खाते से जोड़ा जाता है। आरोपी प्रॉक्सी सर्वर से अमेरिकी नेट का इस्तेमाल कर पीड़ित के बारे में जानकारी जुटा लेते थे। इसके बाद ये विदेशियों को गिरफ्तारी का डर दिखाते थे। वह डर जाता तो पहले ये कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की बात कहते और फिर सेटलमेंट का प्रस्ताव रख देते। पीड़ित तैयार हो जाता तो ये उसके बैंक खाते से पैसे निकालकर उन्हें बिटकॉइन में परिवर्तित कर लेते या फिर गूगल गिफ्ट कार्ड खरीद लेते थे। बिंदापुर के कॉल सेंटर से कनाडा के लोगों को भी ठगा जाता था।
एपल टेक्नीकल सपोर्ट स्कैम
अमेरिका और कनाडा के एपल के प्रॉडक्ट इस्तेमाल करने वाले लोगों को ठग रिकॉर्डिंग मैसेज भेजते थे। ये पहले उनके सिस्टम में वायरस भेज देते। फिर उन्हें फोन कर कहते कि वे एपल टेक्निकल सपोर्ट से बोल रहे हैं और उनके सिस्टम में खराबी आ गई है। ये उनके कंप्यूटर आदि सिस्टम का एक्सेस ले लेते थे। पीड़ित इनसे सिस्टम ठीक कराने के लिए तैयार हो जाता तो वे उसे कुछ ही देर में ठीक कर देते थे। सिस्टम में कोई खराबी होती नहीं थी, बस वे अपना वायरस हटा देते थे। ये पीड़ित को अगले एक साल का प्लान भी देते थे और इसके नाम पर मोटी रकम ऐंठ लेते थे।

अमेजन टेक्निकल सपोर्ट सिस्टम
ये अमेजन अकाउंट रखने वाले लोगों को मैसेज भेजकर कहते थे कि उनके खाते से अवैध रूप से खरीदारी हुई है। ये पीड़ित को टोल फ्री नंबर पर बात करने के लिए कहते थे। इसके बाद अमेजन की टेक्निकल सपोर्ट टीम बनकर पीड़ित से मोटी रकम ऐंठ लेते थे। ये रकम बिटकॉइन और गिफ्ट कार्ड में लेते थे।
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