तीसरे सीरो सर्वे के परिणाम इस हफ्ते के अंत तक आने की उम्मीद
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राजधानी में किए गए तीसरे सीरो सर्वे के परिणाम इस सप्ताह के अंत तक आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी नमूनों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है, उम्मीद है कि रविवार तक परिणाम जारी कर दिए जाएंगे। दिल्ली में 1 से 7 सितंबर तक तीसरा सीरो सर्वे किया गया था।
इसमें प्रत्येक वार्ड से 17 हजार से ज्यादा नमूने लिए गए थे। सर्वे के जरिये यह पता लगाया जाएगा कि इस समय कितने फीसदी लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी है। इससे दिल्ली में कोरोना की स्थिति का विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 7 दिन तक चले सर्वे में 17 हजार से ज्यादा लोगों के नमूने लिए गए थे। इस बार नमूने वार्ड स्तर पर लिए गए हैं, इससे छोटे इलाकों में भी संक्रमण की स्थिति का पता चल सकेगा। सर्वे में उन्हीं नियमों का पालन किया गया है, जो नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की तरफ से किए गए सर्वे में किया गया था।
इसके परिणाम 20 सितंबर तक आने की संभावना है। जिन लोगों के नमूने दूसरे सर्वे में लिए गए थे, इस बार उनके नमूने नहीं लिए गए हैं। सीरोलॉजी टेस्ट में उन लोगों को ही शामिल किया गया है, जिनमें कोई लक्षण नहीं हैं। इसमें अलग-अलग उम्र व इलाके के लोगों के नमूने लिए गए हैं।
इससे पहले 1 से 5 अगस्त तक दूसरा सीरो सर्वे किया गया था, जिसमें राजधानी के करीब 29 प्रतिशत लोग कोविड-19 से प्रभावित मिले थे। यानी 29 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी विकसित होने की बात सामने आई थी। इसका मतलब था कि वे संक्रमित हुए और ठीक हो गए।
विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि तीसरे सीरो सर्वे के परिणाम में करीब 40 फीसदी लोगों में कोरोना संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी मिल सकती है। इससे पता चल सकेगा कि दिल्ली सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता की तरफ कितना बढ़ चुकी है।
पोस्ट कोविड क्लीनिक में मरीज बढ़ रहे
राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बनाए गए पोस्ट कोविड क्लिनिक में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 10 दिन में ही 50 से ज्यादा मरीज यहां परामर्श के लिए आ चुके हैं।
अस्पताल के कोविड नोडल अधिकारी डॉ. अजीत जैन ने बताया कि मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जितने मरीज ठीक हो रहे हैं, उनमें से कुछ लोगों को काफी परेशानियां आ रही हैं।
बीते 10 दिन में ही 50 से ज्यादा मरीज डॉक्टरों से परामर्श लेने के लिए आए हैं। जो मरीज आईसीयू से ठीक होकर गए थे, उनमें थकावट और सांस की समस्याएं लगातार मिल रही हैं। इन मरीजों को संबंधित विभागों में इलाज के लिए भी भेजा जा रहा है।