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दिल्ली विधानसभा में एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पास
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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया। एनआरसी और एनपीआर पर चर्चा के लिए आहूत विशेष सत्र में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सदन में प्रस्ताव पेश किया। चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एनपीआर की जमकर मुखालफत की। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से पूरा देश चिंतित है। बेरोजगारी बढ़ रही है। अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है। सभी सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। सीएम ने कहा कि दिल्ली की पूरी कैबिनेट के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, तो क्या पूरी कैबिनेट डिटेंशन सेंटर में जाएगी। दिल्ली के 61 विधायक के पास नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। सिर्फ 9 लोगों के पास प्रमाण पत्र है। ऐसे में पूछना चाहता हूं क्या सभी डिटेंशन सेंटर जाएंगे। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र तो मेरी पत्नी के पास भी नहीं है। मेरे माता-पिता के पास भी नहीं है।
जनसमस्याओं को दरकिनार कर सरकार एनपीआर और एनआरसी पर क्यों दे रही जोर
एनपीआर जैसे काल्पनिक समस्या से देश की प्रगति नही हो सकती। जनता की वास्तविक समस्याओं को दरकिनार करके हम एनआरसी और एनपीआर के तहत काल्पनिक समस्या पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 20 जून 2019 को राष्ट्रपति ने साफ कहा था कि केंद्र ने तय किया है कि एनआरसी को लागू किया जाएगा। गृह मंत्री ने 10 दिसंबर को कहा कि एनआरसी लागू होकर रहेगा। फिर बचा ही क्या है। सिर्फ यह कहने से कि एनपीआर अलग है एनआरसी नहीं है। इसे लेकर पूरे देश में अफरातफरी मची है। पहले सीएए फिर एनपीआर और फिर एनआरसी आएगा। इससे देश की प्रगति नहीं हो सकती है।
गोपाल राय ने पेश किया प्रस्ताव
गोपाल राय की ओर से पेश प्रस्ताव में कहा गया कि भारत की संसद ने हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून के माध्यम से नागरिकता अधिनियम, 1955 में कुछ संशोधन किए हैं। जिसे 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। इस तथ्य पर एनपीआर को शुरू करने की कवायद होने वाली है। इसमें 9 नए बिंदुओं पर डेटा प्राप्त करने का प्रस्ताव है। भारत सरकार इसे वापस ले और इसकी कवायद को आगे नहीं बढ़ाए। बिना किसी नए बिंदु को जोड़े सिर्फ 2010 के प्रारूप पर ही इसे लागू करे। पेश संकल्प को बहुमत के साथ सदन में पास कर दिया गया।
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जनसमस्याओं को दरकिनार कर सरकार एनपीआर और एनआरसी पर क्यों दे रही जोर
एनपीआर जैसे काल्पनिक समस्या से देश की प्रगति नही हो सकती। जनता की वास्तविक समस्याओं को दरकिनार करके हम एनआरसी और एनपीआर के तहत काल्पनिक समस्या पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 20 जून 2019 को राष्ट्रपति ने साफ कहा था कि केंद्र ने तय किया है कि एनआरसी को लागू किया जाएगा। गृह मंत्री ने 10 दिसंबर को कहा कि एनआरसी लागू होकर रहेगा। फिर बचा ही क्या है। सिर्फ यह कहने से कि एनपीआर अलग है एनआरसी नहीं है। इसे लेकर पूरे देश में अफरातफरी मची है। पहले सीएए फिर एनपीआर और फिर एनआरसी आएगा। इससे देश की प्रगति नहीं हो सकती है।
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गोपाल राय ने पेश किया प्रस्ताव
गोपाल राय की ओर से पेश प्रस्ताव में कहा गया कि भारत की संसद ने हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून के माध्यम से नागरिकता अधिनियम, 1955 में कुछ संशोधन किए हैं। जिसे 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। इस तथ्य पर एनपीआर को शुरू करने की कवायद होने वाली है। इसमें 9 नए बिंदुओं पर डेटा प्राप्त करने का प्रस्ताव है। भारत सरकार इसे वापस ले और इसकी कवायद को आगे नहीं बढ़ाए। बिना किसी नए बिंदु को जोड़े सिर्फ 2010 के प्रारूप पर ही इसे लागू करे। पेश संकल्प को बहुमत के साथ सदन में पास कर दिया गया।
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