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Delhi HC: सरकारी अनुमति के बिना भी फीस बढ़ा सकते हैं निजी स्कूल, जारी सत्र के दौरान वृद्धि के लिए अनुमति जरूरी
Sun, 24 May 2026 05:28 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Sun, 24 May 2026 05:28 AM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में सरकार की अनुमति के बिना भी फीस बढ़ा सकते हैं। स्कूलों को सत्र शुरू होने से पहले शिक्षा निदेशालय को प्रस्तावित फीस का विवरण पेश करना होगा।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में सरकार की अनुमति के बिना भी फीस बढ़ा सकते हैं। स्कूलों को सत्र शुरू होने से पहले शिक्षा निदेशालय को प्रस्तावित फीस का विवरण पेश करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा निदेशालय की स्वीकृति केवल तभी जरूरी होगी, जब वे जारी सत्र के दौरान फीस वृद्धि लागू करना चाहते हों।
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जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने शुक्रवार को सुनाए 120 पन्ने के फैसले में कहा, निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त है और शिक्षा विभाग उनके वित्तीय मामलों के संचालन में माइक्रो मैनेजमेंट नहीं कर सकता। अदालत ने कहा, निजी गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त स्कूलों में शुल्क निर्धारण पर नियामक शक्तियां सीमित हैं और सामान्य हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देती हैं।
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पीठ ने कहा, किसी विद्यालय के खातों में अधिशेष निधि के आधार पर शिक्षा विभाग यह निष्कर्ष नहीं निकाल सकता कि विद्यालय व्यवसायीकरण में लिप्त है। कोर्ट ने यह फैसला 137 स्कूलों की याचिका पर दिया, जिसमें शिक्षा विभाग के वर्ष 2016-2017 से 2022-23 तक के शुल्क वृद्धि के प्रस्तावों को अस्वीकार किए जाने को चुनौती दी गई थी।
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पिछले सत्रों के लिए फीस वसूलने की अनुमति नहीं :
पीठ ने यह निर्देश भी दिया कि शिक्षा निदेशालय को प्रस्तुत विवरणों में स्कूलों की तरफ से प्रस्तावित फीस वृद्धि केवल 2027 के शैक्षणिक सत्र से प्रभावी होगी। किसी भी स्कूल को पिछले शैक्षणिक सत्रों के लिए फीस या अन्य शुल्कों का बकाया वसूलने की अनुमति नहीं होगी।