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पीएम नहीं बल्कि ओजोन दिल्ली में सबसे बड़ा प्रदूषक : सीएसई
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दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने अपनी नई रिपोर्ट में किया खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इस गर्मी में दिल्ली की हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) नहीं बल्कि ओजोन सबसे बड़ा प्रदूषक बनकर उभरा है। यह एक बड़ा बदलाव है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसका खुलासा दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने अपनी नई रिपोर्ट में किया है।
नए विश्लेषण से पता चला है कि जमीनी स्तर पर ओजोन मार्च और मई 2025 के बीच लगभग हर दिन राष्ट्रीय सुरक्षा सीमाओं के तय मानक से अधिक रहा। साथ ही, पिछले वर्षों की तुलना में इसका भौगोलिक विस्तार अधिक होगा और अवधि भी अधिक लंबी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, 25 मई से 11 जून के बीच 18 दिनों में से 12 दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में ओजोन प्रमुख प्रदूषक रहा, जिसने इतने लंबे समय में पहली बार महीन कण पदार्थ (पीएम2.5) को विस्थापित कर दिया। इसके बावजूद मौजूदा आपातकालीन प्रतिक्रिया ढांचे, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) में ओजोन या इसके पूर्ववर्ती गैसों को रोकने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। दक्षिण दिल्ली का नेहरू नगर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां ओजोन का स्तर हर दिन सुरक्षित सीमा को पार कर रहा था, जबकि नोएडा के सेक्टर 125 और गाजियाबाद के वसुंधरा में राष्ट्रीय राजधानी के बाहर सबसे अधिक दिनों तक ओजोन का स्तर बढ़ा।
ओजोन का स्तर रात तक भी बना रहा
विश्लेषण से पता चला कि ओजोन का स्तर न केवल दिन के समय बढ़ा बल्कि अक्सर देर रात तक ऊंचा बना रहा। दिल्ली के स्टेशनों ने प्रतिदिन 14.2 घंटे ओजोन के स्तर को मानक से ऊपर दर्ज किया, जो पिछली गर्मियों में 12 घंटे था। एनसीआर के शहरों में यह आंकड़ा बढ़कर 15 घंटे हो गया। गुरुग्राम के ग्वाल पहाड़ी में रात के समय ओजोन की सबसे अधिक घटनाएं दर्ज की गईं। इस गर्मी में सबसे ज्यादा रीडिंग दिल्ली के सीआरआरआई मथुरा रोड स्टेशन से आई, जहां 19 मई को आठ घंटे का औसत 472 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय मानक से चार गुना अधिक है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इस गर्मी में दिल्ली की हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) नहीं बल्कि ओजोन सबसे बड़ा प्रदूषक बनकर उभरा है। यह एक बड़ा बदलाव है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसका खुलासा दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने अपनी नई रिपोर्ट में किया है।
नए विश्लेषण से पता चला है कि जमीनी स्तर पर ओजोन मार्च और मई 2025 के बीच लगभग हर दिन राष्ट्रीय सुरक्षा सीमाओं के तय मानक से अधिक रहा। साथ ही, पिछले वर्षों की तुलना में इसका भौगोलिक विस्तार अधिक होगा और अवधि भी अधिक लंबी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, 25 मई से 11 जून के बीच 18 दिनों में से 12 दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में ओजोन प्रमुख प्रदूषक रहा, जिसने इतने लंबे समय में पहली बार महीन कण पदार्थ (पीएम2.5) को विस्थापित कर दिया। इसके बावजूद मौजूदा आपातकालीन प्रतिक्रिया ढांचे, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) में ओजोन या इसके पूर्ववर्ती गैसों को रोकने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। दक्षिण दिल्ली का नेहरू नगर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां ओजोन का स्तर हर दिन सुरक्षित सीमा को पार कर रहा था, जबकि नोएडा के सेक्टर 125 और गाजियाबाद के वसुंधरा में राष्ट्रीय राजधानी के बाहर सबसे अधिक दिनों तक ओजोन का स्तर बढ़ा।
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ओजोन का स्तर रात तक भी बना रहा
विश्लेषण से पता चला कि ओजोन का स्तर न केवल दिन के समय बढ़ा बल्कि अक्सर देर रात तक ऊंचा बना रहा। दिल्ली के स्टेशनों ने प्रतिदिन 14.2 घंटे ओजोन के स्तर को मानक से ऊपर दर्ज किया, जो पिछली गर्मियों में 12 घंटे था। एनसीआर के शहरों में यह आंकड़ा बढ़कर 15 घंटे हो गया। गुरुग्राम के ग्वाल पहाड़ी में रात के समय ओजोन की सबसे अधिक घटनाएं दर्ज की गईं। इस गर्मी में सबसे ज्यादा रीडिंग दिल्ली के सीआरआरआई मथुरा रोड स्टेशन से आई, जहां 19 मई को आठ घंटे का औसत 472 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय मानक से चार गुना अधिक है।
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