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अब जागा चुनाव आयोग
बृजेश सिंह/ नई दिल्ली
Updated Mon, 25 Nov 2013 09:46 PM IST
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चुनावों के दौरान दर्ज मामलों को निपटाने में चुनाव आयोग फिसड्डी साबित हो रहा है। आलम यह है कि पांच साल पहले 2008 के चुनावों में दर्ज मामलों में करीब 75 फीसदी मामले अभी तक लंबित पड़े हैं।
पांच साल बाद अब, जब दूसरा चुनाव चल रहा है तब जाकर आयोग सक्रिय हुआ है। आयोग में बीते चुनावों में दर्ज केस के निपटारे को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।
चुनाव आयोग ने दिल्ली समेत सभी चुनावी राज्यों को लंबित पड़े केस को जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में राजधानी के सभी सरकारी वकीलों के साथ बैठक कर मामलों के जल्द निपटारे के बारे में चर्चा भी की है।
चुनाव अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में अकेले एक्साइज विभाग ने 2008 में जितने केस दर्ज कराए थे उसमें 75 फीसदी में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
अधिकारियों की मानें तो कई मामलों में प्रत्याशियों पर भी कार्रवाई की संभावना होती है मगर समय पर सुनवाई खत्म नहीं होने से मामला खींचता चला जाता है।
अहम बात यह है कि इसी वर्ष अभी तक अकेले दिल्ली में बीजेपी, कांग्रेस, बसपा व आप समेत अन्य दलों पर 300 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं।
2008 चुनाव में हुई कार्रवाई
चुनाव आयोग के निर्देश पर पिछले चुनावों में 20,215 पोस्टरों और 16,808 बैनरों को हटाया गया था।
इसी प्रकार 394 आर्म्स सीज किए गए और 86 व्यक्तियों को पकड़ा गया था।
2008 में कुल 964 एफआईआर दर्ज की गई थी। साथ ही 2,258 लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे।
कब-कब हो सकती है कार्रवाई
केस लंबित होने से प्रत्याशियों पर जुर्माने से लेकर उम्मीदवारी रद्द करने का प्रावधान है। जिसमें हिसाब-किताब में किसी तरह की गड़बड़ी मिलना।
किसी तरह की गलत सूचना देना व चुनाव-प्रचार के दौरान रिश्वत या भ्रामक सूचनाएं फैलाना शामिल है।
वैसे शराब तस्करी या वोट के खरीद-फरोख्त में शामिल होने पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा पब्लिक डिफेसमेंट एक्ट के साथ आचार-संहिता के उल्लंघन करने पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
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पांच साल बाद अब, जब दूसरा चुनाव चल रहा है तब जाकर आयोग सक्रिय हुआ है। आयोग में बीते चुनावों में दर्ज केस के निपटारे को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है।
चुनाव आयोग ने दिल्ली समेत सभी चुनावी राज्यों को लंबित पड़े केस को जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में राजधानी के सभी सरकारी वकीलों के साथ बैठक कर मामलों के जल्द निपटारे के बारे में चर्चा भी की है।
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चुनाव अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में अकेले एक्साइज विभाग ने 2008 में जितने केस दर्ज कराए थे उसमें 75 फीसदी में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
अधिकारियों की मानें तो कई मामलों में प्रत्याशियों पर भी कार्रवाई की संभावना होती है मगर समय पर सुनवाई खत्म नहीं होने से मामला खींचता चला जाता है।
अहम बात यह है कि इसी वर्ष अभी तक अकेले दिल्ली में बीजेपी, कांग्रेस, बसपा व आप समेत अन्य दलों पर 300 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं।
2008 चुनाव में हुई कार्रवाई
चुनाव आयोग के निर्देश पर पिछले चुनावों में 20,215 पोस्टरों और 16,808 बैनरों को हटाया गया था।
इसी प्रकार 394 आर्म्स सीज किए गए और 86 व्यक्तियों को पकड़ा गया था।
2008 में कुल 964 एफआईआर दर्ज की गई थी। साथ ही 2,258 लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे।
कब-कब हो सकती है कार्रवाई
केस लंबित होने से प्रत्याशियों पर जुर्माने से लेकर उम्मीदवारी रद्द करने का प्रावधान है। जिसमें हिसाब-किताब में किसी तरह की गड़बड़ी मिलना।
किसी तरह की गलत सूचना देना व चुनाव-प्रचार के दौरान रिश्वत या भ्रामक सूचनाएं फैलाना शामिल है।
वैसे शराब तस्करी या वोट के खरीद-फरोख्त में शामिल होने पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा पब्लिक डिफेसमेंट एक्ट के साथ आचार-संहिता के उल्लंघन करने पर भी कार्रवाई की जा सकती है।