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‘आप’ के स्पीकर का चुनाव कराएंगे भाजपा विधायक

Mon, 23 Dec 2013 01:38 AM IST
अखिलेश कुमार/ नई दिल्ली
अखिलेश कुमार/ नई दिल्ली Updated Mon, 23 Dec 2013 01:38 AM IST
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BJP MLA will choose speaker of AAP

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनना तय माना जा रहा है। इसी के साथ 15 दिन सरकार बनाने को लेकर जो ऊहापोह चल रही थी वह भी खत्म होने के साफ-साफ संकेत मिल रहे हैं।

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चुनाव परिणाम के पंद्रहवें दिन आम आदमी पार्टी (आप) सरकार बनाने का दावा पेश करेगी तो विधानसभा सचिवालय ने भी तैयारी शुरू कर दी है।

सचिवालय ने उपराज्यपाल सचिवालय को सूचित कर दिया है कि सत्र बुलाए जाने के लिए तीन दिन पूर्व सूचना चाहिए ताकि तैयारी हो सके।

विधानसभा अधिकारियों के अनुसार, विधायकों को शपथ प्रोटेम स्पीकर दिलाएंगे जिनकी सूची तैयार की गई है।

सूची में 11 नाम प्रोटेम स्पीकर के लिए रखे गए हैं लेकिन वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर भाजपा विधायक प्रो. जगदीश मुखी हैं। न सिर्फ पांच बार के विधायक हैं बल्कि दो बार कार्यकारी पार्षद, वित्त मंत्री और नेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्य का अनुभव है।
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उम्र के हिसाब से भी 65 वर्ष से अधिक उम्र के एकमात्र विधायक प्रो. जगदीश मुखी ही हैं। ऐसे में तय माना जा रहा है कि न सिर्फ विधायकों को शपथ दिलवाने बल्कि आप की तरफ से बनाए जाने वाले विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी वही कराएंगे।
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दिल्ली की पांचवीं विधानसभा में चुने गए 70 में से 48 विधायक पहली बार सदन की बैठक में हिस्सा लेंगे।

यही वजह है कि प्रोटेम स्पीकर की सूची में भाजपा, कांग्रेस विधायकों के अलावा पांच बार चुनाव जीतने व उपाध्यक्ष के रूप से सदन चला चुके शोएब इकबाल का नाम भी शामिल किया गया है। हालांकि प्रोटेम स्पीकर को लेकर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के हाथ में होता है।

दिल्ली में 1993 में गठित पहली विधानसभा का पहला सत्र 10 दिन का बुलाया गया था जिसमें प्रश्नकाल भी रखे गए थे। जबकि दूसरी, तीसरी व चौथी विधानसभा का पहला सत्र महज 4-4 दिन का हुआ है। लेकिन पांचवीं विधानसभा में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है।

ऐसे में विश्वास सिद्ध करने के लिए एक दिन अतिरिक्त बैठक होगी।

पांच दिन के सत्र में पहले दिन विधायकों की शपथ, दूसरे दिन शपथ व स्पीकर का चुनाव, तीसरे दिन विश्वास सिद्ध करना, चौथे दिन उपराज्यपाल का अभिभाषण और पांचवें दिन अभिभाषण को पास कराना होगा।


बताते हैं कि 26 दिसंबर को उपराज्यपाल मुख्यमंत्री व मंत्री को शपथ दिलाते हैं तो  31 दिसंबर या फिर एक जनवरी 2014 से सत्र बुलाया जा सकता है। हालांकि सत्र की तारीख व एजेंडा तय करने का अधिकार कैबिनेट के पास होता है।

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