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‘स्पीडी ट्रायल पीड़ित के हित में भी उचित’

Wed, 27 Mar 2013 05:30 AM IST
New Delhi
New Delhi Updated Wed, 27 Mar 2013 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। ‘स्पीडी ट्रायल अभियुक्त ही नहीं बल्कि पीड़ित के हित में भी ठीक है। कानून में प्रावधान है किसी भी आपराधिक मामले का ट्रायल दो माह में पूरा हो जाना चाहिए।’ वसंत विहार गैंगरेप मामले की प्रतिदिन सुनवाई को बंद करने संबंधी बचाव पक्ष के तर्क पर आपत्ति जताते हुए दिल्ली पुलिस ने अदालत में इस बात को रखा। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने प्रतिदिन सुनवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके मुवक्किलों के हित में सुनवाई एक या दो दिन छोड़ कर की जाए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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साकेत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश योगेश खन्ना के सामने अभियुक्त मुकेश और अक्षय के वकील के आवेदन पर विशेष सरकारी वकील दयान कृष्णन ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कानून में यह भी प्रावधान है कि ठोस आधार के बिना अदालत को सुनवाई स्थगित नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष के वकील ट्रायल को लंबा खींचने का प्रयास कर रहे हैं। वकील यदि किसी अन्य कोर्ट में होने का तर्क देकर सुनवाई स्थगित करवाना चाहता है तो उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
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अधिवक्ता दयान ने कहा कि बचाव पक्ष को आरोपपत्र और अन्य दस्तावेज हिंदी में अनुवाद करवाकर दे दिए गए हैं। अधिवक्ता एमएल शर्मा से पहले दोनों अभियुक्तों के वकील वीके आनंद थे। वे अपने मुवक्किलों कोे केस की जानकारी देते थे। यहीं कारण है कि अब तक 62 गवाहों के बयान पूरे हो चुके हैं। दयान ने कहा कि नए अधिवक्ता किसी न किसी बहाने सुनवाई को स्थगित करवाने में लगे हैं। अत: उनके आवेदन को खारिज कर मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के अनुसार जारी रखी जाए।
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ट्रायल को टालने के प्रयास में बचाव पक्ष
नई दिल्ली। वसंत विहार गैंगरेप मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता को बदलने के बाद से ही ट्रायल को किसी न किसी तरह से टालने का प्रयास जारी है। मंगलवार को मुकेश और अक्षय के वकील ने हिंदी-अंग्रेजी के मुद्दे पर करीब दो घंटे तक बहस की। साकेत स्थित न्यायाधीश योगेश खन्ना के सामने दोनों अभियुक्तों के वकील एमएल शर्मा ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देकर तर्क रखा कि उनके मुवक्किलों को हर बात हिंदी में जानने का अधिकार है। अदालत ने सुनवाई हिंदी में होने का हवाला दिया तो बचाव पक्ष ने मुद्दा बदल दिया। उसने कहा कि गवाह के बयान होने के बाद उसको मुवक्किल को समझाने के लिए एक से दो दिन का समय दिया जाए। विशेष सरकारी वकील और न्यायाधीश द्वारा ऐसे प्रावधान न होने की जानकारी देने पर बचाव पक्ष ने माफी मांग ली। अदालत ने अभियुक्तों के वकील को कई बार समझाया कि जिन फैसलों का वो हवाला दे रहे हैं, वे इस मामले में लागू नहीं होते। कई बार तो न्यायाधीश ने उन्हें फटकार भी लगाई कि वे बिना वजह तर्क देकर अदालत का समय नष्ट कर रहे हैं। बाद में जब अदालत ने फैसला 28 मार्च तक सुरक्षित रख लिया तो उन्होंने पुन: आपत्ति जताई कि इतनी जल्दी फैसले की क्या जरूरत है। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वो हर हाल में 28 मार्च को अपना फैसला देंगे।

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विनय ने मांगा ट्यूटर
नई दिल्ली। एयर फोर्स में एलडीसी पद के लिए अभियुक्त विनय शर्मा की सात अप्रैल को परीक्षा है। अभियुक्त के वकील एके सिंह ने अदालत के सामने विनय को परीक्षा की तैयारी के लिए ट्यूटर प्रदान करने का आग्रह किया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता को इस आवेदन पर 28 मार्च को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इससे पहले वकील एके सिंह ने कोर्ट को बताया था कि अभियुक्त को एयर फोर्स में हेडकांस्टेबल पद के लिए इंटरव्यू देना है।
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