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महिला उत्पीड़न पर शीला ने की निंदा

New Delhi Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बृहस्पतिवार को राजधानी में आयोजित राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक में महिलाओं के प्रति हिंसा और उत्पीड़न पर निंदा जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने का भरोसा दिए जाने की जरूरत है। यह शर्म की बात है कि ऐसी घटनाएं राजधानी और देश के अन्य हिस्सों में हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण के लिए दिल्ली सरकार की तरफ से किए जा रहे कार्यों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए हैं जिनसे महिलाएं सुरक्षित और संरक्षित महसूस कर सकें। एक-दो दिन में विशेष हेल्पलाइन 181 चालू हो जाएगी। इस नंबर पर महिलाएं चौबीस घंटे संपर्क कर सकेंगी। दिल्ली पुलिस से अधिक पीसीआर वैन लगाने, पुलिस प्रोटोकॉल का व्यापक प्रचार करने और आम आदमी के साथ सलीके से पेश आने के लिए पुलिस बल को समुचित प्रशिक्षण दिए जाने का अनुरोध किया गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पांच फास्ट ट्रैक अदालतें जल्द शुरू करने का फैसला किया है। सामाजिक रिश्तों की मजबूती के लिए एनजीओ, टीवी व रेडियो पर अभियान शुरू किया गया है। दिल्ली महिला आयोग को विशेष रकम इसके लिए जारी की गई है। चालू वित्त वर्ष में महिलाओं से जुड़े कार्यक्रम के लिए 1380 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है।
समय से मिल रही 96 सेवाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम और सूचना के अधिकार अधिनियम को लागू कर दिया गया है। नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं प्रदान करने का कानून 2011 लागू करके 96 सेवाएं जोड़ दी हैं। समय पर सेवा नहीं मिलने पर नागरिक मुआवजा मांग सकते हैं। इतना ही नहीं दिल्ली भू स्पेटियल डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्ट, 2011 लागू किया है। इसके तहत जीआईएस आधारित डाटा एक जगह उपलब्ध है। इसका इस्तेमाल 12वीं योजना की परियोजना को मंजूरी देने के लिए किया जाएगा।
प्रवासी की भीड़ से सुविधाएं देनेे में दिक्कत: शीला
मुख्यमंत्री ने मांग रखी कि अन्य राज्यों की तरह स्थानीय निकायों के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता जारी की जानी चाहिए। ढांचागत परियोजनाओं, नागरिक सेवाओं और सामाजिक क्षेत्र के लिए निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए जरूरी है कि केंद्रीय करों में अधिक भागीदारी मिले। दिल्ली में देशभर से आने वाले लोगों के कारण संसाधन जुटाना एक चुनौती है। सुविधाएं कम पड़ रही हैं। विकास प्रक्रिया में गरीबों को शामिल किया जाना जरूरी है। महिलाओं और गरीबों के समूह को इस विकास की गति से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। सामाजिक योजनाओं का नकदी आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजना शुरू किया जा चुका है। सामाजिक क्षेत्र के लिए बजट का 65 फीसदी हिस्सा रखा गया है। दिल्ली के बुनियादी ढांचे, नागरिक सेवाओं और सामाजिक क्षेत्र के लक्ष्य को देखते हुए वार्षिक अनुदान राशि 3500 करोड़ रुपये तक बढ़ाए जाने की सहमति दी जानी चाहिए। इतना ही नहीं अन्य राज्यों की तरह केन्द्र सरकार से दिल्ली के स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। दिल्ली में रोजगार के साधन, शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधा और शहर की चकाचौंध के कारण बड़ी संख्या में लोग देशभर से आते हैं। संसाधन जुटाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में साफ सफाई, बिजली, पानी, सीवर व परिवहन जैसी व्यवस्था की अधिक करने का दबाव रहता है। निजी वाहनों के कारण सड़क पर दिक्कत हो रही है जिसके लिए जरूरी है कि नए तरह के मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम का विकास हो। हालांकि, प्रवासियों के आने से संस्कृति के विकास को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
दो जनवरी को महिला सुरक्षा सम्मान मार्च
दिल्ली महिला आयोग की तरफ से महिला सुरक्षा सम्मान मार्च, दो जनवरी, 2013 को होगा। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने यह जानकारी एनडीसी की बैठक में दी। प्रगति मैदान से राजघाट के बीच होने वाले इस मार्च में महिला पंचायत की महिलाओं के अलावा दिल्ली के अलग-अलग गैर सरकारी संगठन और समाज सेवी शामिल होंगे।

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