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फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील
New Delhi
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पत्नी और दो बच्चों की हत्या मामले में निचली अदालत से व्यवसायी को मिली फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह चौंकाने वाला अपराध जरूर है, लेकिन इसके लिए फांसी की सजा देना उचित नहीं होगा। न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने फैसले में कहा कि पेश तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है, आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से हत्या की थी। उसने हत्या के लिए पिस्टल खरीदी थी। अभियोजन पक्ष उसका अपराध साबित करने में सफल रहा है। अदालत ने कहा कि जहां तक फांसी की सजा का सवाल है तो वे महसूस करते हैं कि घटना के समय उसकी आयु मात्र 31 वर्ष थी और दिमागी हालत ठीक नहीं थी। उसका पहला अपराध था। वहीं, अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि उसने वित्तीय हालत खराब होने से अपराध को अंजाम दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी ने हाल ही में दक्षिणी दिल्ली में संपत्ति बेची थी। अत: नहीं माना जा सकता कि उसकी वित्तीय हालत खराब थी। वे उसकी फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील करते हैं। निचली अदालत ने 6 अक्तूबर 2010 को उसे फांसी की सजा सुनाई थी।
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