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फर्जी कागजात से प्लॉट पाने वाले नौ गिरफ्तार
New Delhi
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। सरकार की ओर से विस्थापितों के लिए आवंटित प्लॉट को फर्जी कागजात व नाम के जरिए हथियाने वाले नौ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में एक महिला भी शामिल है। फर्जीवाड़ा की शिकायत होने के बाद एमसीडी के सतर्कता विभाग ने इसकी जांच की थी और गड़बड़ी पाए जाने के बाद राजौरी गार्डन थाने में फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज करवाया था। पुलिस ने सभी आवंटियों के कागजों की जांच के बाद नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त वी रंगनाथन ने बताया कि सरकार ने रघुवीर नगर स्थित झुग्गियों को वर्ष 2002 में हटाया था। यहां के लोगों को बक्कड़वाला में प्लॉट दिया गया। रघुवीर नगर झुग्गी में रहने वालों ने प्रमाण के तौर पर कागजात पेश किए थे। कुछ लोगों ने फर्जी कागजात देकर वहां प्लॉट ले लिया।
9 जून 2002 को बक्कड़वाला जे जे पुनर्वास कॉलोनी निवासी आनंद कुमार प्रधान सहित अन्य लोगों ने उपराज्यपाल, सचिव शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्रालय और उपायुक्त स्लम को एक शिकायत पत्र दिया। जिसमें बताया गया कि ऐसे लोगों को प्लॉट मिल गया है जो रघुवीर नगर के झुग्गी में रहते भी नहीं थे। डी ब्लॉक में ऐसे 36 प्लॉट हैं जिन्हें फर्जी लोगों को आवंटित किया गया है। कुछ ऐसे लोगों को प्लॉट मिला है जो बक्कड़वाला गांव में रहते हैं।
स्लम विभाग के सहायक निदेशक फिलिप टप्पो की शिकायत पर राजौरी गार्डन पुलिस ने 14 मई 2003 में फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज कर लिया गया। दिल्ली पुलिस की डिस्ट्रिक्ट इन्वेस्टीगेशन यूनिट की टीम ने मामले की जांच शुरू की और सभी आवंटियों के कागजात की छानबीन की। इसमें से नौ लोगों के कागजों में फर्जीवाड़ा पाया गया, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान सुनील कुमार, धर्मेंद्र, राजेश, जोगिंदर, प्रवीण, मोहिंदर, सुरेश, रामकुमार और आशा देवी के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि इनमे से कुछ लोगों ने फर्जी नाम के कागजात देकर प्लॉट लिया है। पुलिस के मुताबिक इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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9 जून 2002 को बक्कड़वाला जे जे पुनर्वास कॉलोनी निवासी आनंद कुमार प्रधान सहित अन्य लोगों ने उपराज्यपाल, सचिव शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्रालय और उपायुक्त स्लम को एक शिकायत पत्र दिया। जिसमें बताया गया कि ऐसे लोगों को प्लॉट मिल गया है जो रघुवीर नगर के झुग्गी में रहते भी नहीं थे। डी ब्लॉक में ऐसे 36 प्लॉट हैं जिन्हें फर्जी लोगों को आवंटित किया गया है। कुछ ऐसे लोगों को प्लॉट मिला है जो बक्कड़वाला गांव में रहते हैं।
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स्लम विभाग के सहायक निदेशक फिलिप टप्पो की शिकायत पर राजौरी गार्डन पुलिस ने 14 मई 2003 में फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज कर लिया गया। दिल्ली पुलिस की डिस्ट्रिक्ट इन्वेस्टीगेशन यूनिट की टीम ने मामले की जांच शुरू की और सभी आवंटियों के कागजात की छानबीन की। इसमें से नौ लोगों के कागजों में फर्जीवाड़ा पाया गया, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान सुनील कुमार, धर्मेंद्र, राजेश, जोगिंदर, प्रवीण, मोहिंदर, सुरेश, रामकुमार और आशा देवी के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि इनमे से कुछ लोगों ने फर्जी नाम के कागजात देकर प्लॉट लिया है। पुलिस के मुताबिक इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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