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आईजीआई के निर्माण पर अरबों रुपये के घोटाले का आरोप

Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
New Delhi
New Delhi Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के प्राइवेट पार्टनरशिप प्रोजक्ट के तहत निर्माण व विस्तार में गड़बड़ियों व अरबों रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। अदालत ने केंद्र सरकार, एयरपोर्ट ऑफ इंडिया व दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड-डायल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याची ने कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने डायल को बहुमूल्य जमीन कौड़ियों के दाम पर प्रदान की है जबकि डायल तय शर्तो का उल्लंघन कर रहा है।
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मुख्य न्यायाधीश डी मुरूगेसन व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की खंडपीठ ने तीनों पक्षों को 31 अक्तूबर तक स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका विचारार्थ स्वीकार कर ली जाए। इतना ही नहीं अदालत ने केंद्र सरकार को अगली सुनवाई में वरिष्ठ लॉ अधिकारी को पेश कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि कैग की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने पेश अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल राजीव मेहरा को निर्देश दिया कि इस बात का खुलासा किया जाए कि कैग की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई है या नहीं। खंडपीठ ने यूथ अगेंस्ट करप्शन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। याची के अधिवक्ता कृष्णामनी ने अदालत को बताया कि पीपीपी के तहत इस योजना में कई अनियमितताएं बरती गई हैं। सरकार ने डायल को 190 एकड़ भूमि मात्र तीन करोड़ 25 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दे दी, जबकि बाजार भाव 100 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का था। उन्होंने कहा कि 12,857 करोड़ रुपये के इस प्रोजक्ट में डायल से जुड़ी कंपनी जीएमआर ने मात्र 1813 करोड़ रुपये का निवेश किया है, वहीं इस राशि पर सरकार ने उसे 4,799 करोड़ रुपये की भूमि प्राइम लोकेशन पर प्रदान कर दी।
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उन्होंने कहा सरकार ने डायल को कम दरों पर सुविधाएं प्रदान कीं, जबकि वह उपभाक्ताओं से ज्यादा राशि वसूल रही है। इसी प्रकार सरकार ने डायल को विभिन्न मदों जैसे विकास शुल्क व कार पार्किंग में उच्च राशि वसूलने की इजाजत प्रदान कर दी और टैरिफ पर विचार नहीं किया। डायल ने कई शर्तों का उल्लंघन किया बावजूद इसके कार्रवाई करने की अपेक्षा बिना कोई मोलभाव किए 30 वर्ष के लिए अनुबंध बढ़ा दिया।
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