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दिल्ली का नया बोर्ड रटकर सीखने की परंपरा को खत्म करेगा: सिसोदिया

Wed, 31 Mar 2021 12:01 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 31 Mar 2021 12:01 AM IST
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New Delhi Education Board will eleminate the practice of repetition
नई दिल्ली। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन एक महत्वपूर्ण कदम है। तीन उद्देश्यों के साथ इस बोर्ड की स्थापना को मंजूरी दी गई है। पहला, यह बोर्ड सीखने के लिए रटने की पद्धति को समाप्त करेगा। यह बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता, व 21वीं सदी के कौशलों को विकसित करेगा। ये बातें उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बोर्ड की पहली बैठक में कही।
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मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की जनरल बॉडी की मंगलवार को पहली बैठक हुई। पहली बैठक में सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का पंजीकरण, इसके गठन और आगामी सत्र से इसके कामकाज पर चर्चा की गई। साथ ही बोर्ड के सदस्य, मनोनीत सदस्यों का परिचय व बोर्ड के विजन से अवगत कराया गया।
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बैठक में नामित व पदेन सदस्यों ने भाग लिया। दिल्ली कैबिनेट ने 06 मार्च को बोर्ड की स्थापना को मंजूरी दी थी। जिसके बाद 19 मार्च को बोर्ड को पंजीकृत कराया गया। बैठक को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने बोर्ड के उद्देश्यों के बारे में कहा कि ये बोर्ड निरंतर फॉर्मेटिव मूल्यांकन पर जोर देगा। यह मूल्यांकन प्रणाली को पार्टनर ऑफ लर्निंग बनाएगा ना कि अथॉरिटी ऑफ टेस्टिंग।
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तीसरा, इसके तहत बच्चों का नियमित मूल्यांकन होगा। उन्होंने कहा कि हमें यह देखना होगा कि बच्चे न सिर्फ अपने विषयों में दक्षता प्राप्त करें बल्कि वे अपने परिवार, समाज और राष्ट्र से भी गहराई से जुड़ सकें।

यह बोर्ड शिक्षकों को उनकी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए सशक्त बनाएगा। उन्हें समय-समय पर फीडबैक देगा जिससे वह अपनी कक्षा में हर बच्चे को सीखने में मदद कर सकें। बोर्ड शिक्षकों को अधिक प्रभावी इनपुट देगा जिससे वह बच्चों की कक्षा में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में उनकी सहायता करेंगे। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गेम आधारित आकलन का उपयोग एक ऐसी प्रणाली तैयार करने के लिए किया जाएगा, जहां बच्चे की क्षमता के आधार पर नियमित मूल्यांकन होगा।
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