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सेंट्रल विस्टा निर्माण कार्य को रोकने के मुद्दे पर फैसला सुरक्षित
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने सोमवार को सेंट्रल विस्टा निर्माण पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिका में तर्क रखा गया है कि वर्तमान कोविड महामारी के बावजूद निर्माण कार्य जारी है जबकि यह केंद्र सरकार द्वारा घोषित ‘आवश्यक’ सेवा में नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता व केंद्र सरकार के तर्क सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा जब याचिका दायर की गई उस समय निर्माण स्थल पर श्रमिकों और दिल्ली के लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई गईं।
उन्होंने 4 मई को कोविड पॉजिटिविटी रेट और मौतों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि क्या नागरिकों की जान से ज्यादा अहम सेंट्रल विस्टा का निर्माण कार्य है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने पंडित परमानंद कटारा मामले की हवाला देते हुए कहा कि फोटोग्राफ से स्पष्ट है कि वहां बिस्तर नहीं है, न ही चिकित्सा का उचित प्रबंध।
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लूथरा ने कहा एसपीसीपीएल द्वारा शुरू में लगभग 400 श्रमिकों को लगाया गया था लेकिन कुछ श्रमिकों ने वापस जाने की इच्छा व्यक्त की और अब भी वहां करीब 280 श्रमिक हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिक खतरनाक माहौल में काम कर रहे हैं। श्रमिकों केे एक मई से काम पर लगाया गया लेकिन उनका बीमा 5 मई 21 से 4 मई 22 तक का करवाया गया।
लूथरा ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि श्रमिकों को प्रति दिन कार्य स्थल पर लाया जाता है। यहां मात्र श्रमिक ही नहीं बल्कि सीवरेज, एमटीएनएल, पुलिस कर्मी भी आते हैं। वर्तमान में महामारी को देखते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगाना जरूरी है ताकि सभी श्रमिकों के जीवन को संकट में डालने से रोका जा सके।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने परियोजना का बचाव करते हुए कहा कि परियोजना के लिए कई चुनौतियां रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई दिनों तक बहस सुनने के बाद इस परियोजना को मंजूरी दे दी थी। यह निर्माण लंबे समय से चल रहा है लेकिन कुछ लोग सामने आने की अपेक्षा बिना कारण इसमें बाधा उत्पन्न करने में लगे हैं।
उन्होंने कहा कि निर्माण पर सीमित प्रतिबंध 19 अप्रैल को लगाया गया था क्योंकि श्रमिक निर्माण कार्य स्थल पर नहीं रहते थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जनहित याचिका के जरिये निर्माण बंद करवाना चाहते हैं जबकि निर्माण कार्य स्थल पर उचित चिकित्सा व्यवस्था सहित अन्य प्रबंध हैं। उन्होंने याचिकाकर्ता के मात्र सेंट्रल विस्टा के निर्माण का मुद्दा उठाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजधानी में कई अन्य परियोजनाएं चल रही हैं लेकिन उनके निर्माण पर रोक की मांग नहीं की गई। क्या वहां श्रमिक काम नहीं कर रहे।
निर्माण कार्य कर रही कंपनी ने भी याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दोनों याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि काम कब पूरा करना है। उन्होंने गणतंत्र दिवस का हवाला देते हुए कहा कि आधा राजपथ खोदा जा चुका है यदि बरसात के मौसम में पानी भरने की अनुमति दी जाती है तो आसपास के क्षेत्रों में गड्ढे हो जाएंगे। ऐसे में यदि हम गणतंत्र दिवस परेड का जश्न मनाना चाहते हैं तो हम इसमें देरी नहीं कर सकते।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता व केंद्र सरकार के तर्क सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा जब याचिका दायर की गई उस समय निर्माण स्थल पर श्रमिकों और दिल्ली के लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई गईं।
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उन्होंने 4 मई को कोविड पॉजिटिविटी रेट और मौतों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि क्या नागरिकों की जान से ज्यादा अहम सेंट्रल विस्टा का निर्माण कार्य है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने पंडित परमानंद कटारा मामले की हवाला देते हुए कहा कि फोटोग्राफ से स्पष्ट है कि वहां बिस्तर नहीं है, न ही चिकित्सा का उचित प्रबंध।
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लूथरा ने कहा एसपीसीपीएल द्वारा शुरू में लगभग 400 श्रमिकों को लगाया गया था लेकिन कुछ श्रमिकों ने वापस जाने की इच्छा व्यक्त की और अब भी वहां करीब 280 श्रमिक हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिक खतरनाक माहौल में काम कर रहे हैं। श्रमिकों केे एक मई से काम पर लगाया गया लेकिन उनका बीमा 5 मई 21 से 4 मई 22 तक का करवाया गया।
लूथरा ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि श्रमिकों को प्रति दिन कार्य स्थल पर लाया जाता है। यहां मात्र श्रमिक ही नहीं बल्कि सीवरेज, एमटीएनएल, पुलिस कर्मी भी आते हैं। वर्तमान में महामारी को देखते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगाना जरूरी है ताकि सभी श्रमिकों के जीवन को संकट में डालने से रोका जा सके।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने परियोजना का बचाव करते हुए कहा कि परियोजना के लिए कई चुनौतियां रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई दिनों तक बहस सुनने के बाद इस परियोजना को मंजूरी दे दी थी। यह निर्माण लंबे समय से चल रहा है लेकिन कुछ लोग सामने आने की अपेक्षा बिना कारण इसमें बाधा उत्पन्न करने में लगे हैं।
उन्होंने कहा कि निर्माण पर सीमित प्रतिबंध 19 अप्रैल को लगाया गया था क्योंकि श्रमिक निर्माण कार्य स्थल पर नहीं रहते थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जनहित याचिका के जरिये निर्माण बंद करवाना चाहते हैं जबकि निर्माण कार्य स्थल पर उचित चिकित्सा व्यवस्था सहित अन्य प्रबंध हैं। उन्होंने याचिकाकर्ता के मात्र सेंट्रल विस्टा के निर्माण का मुद्दा उठाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजधानी में कई अन्य परियोजनाएं चल रही हैं लेकिन उनके निर्माण पर रोक की मांग नहीं की गई। क्या वहां श्रमिक काम नहीं कर रहे।
निर्माण कार्य कर रही कंपनी ने भी याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दोनों याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि काम कब पूरा करना है। उन्होंने गणतंत्र दिवस का हवाला देते हुए कहा कि आधा राजपथ खोदा जा चुका है यदि बरसात के मौसम में पानी भरने की अनुमति दी जाती है तो आसपास के क्षेत्रों में गड्ढे हो जाएंगे। ऐसे में यदि हम गणतंत्र दिवस परेड का जश्न मनाना चाहते हैं तो हम इसमें देरी नहीं कर सकते।