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फर्जीवाड़ा: शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक गिरफ्तार, झूठा सपना दिखाकर कई लोगों से 14 करोड़ की ठगी
Mon, 28 Feb 2022 06:21 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 28 Feb 2022 06:21 PM IST
सार
आर्थिक अपराध शाखा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक गिरफ्तार किया है। आरोपी ने ग्रेटर नोएडा की परियोजना में फ्लैट का सपना दिखाकर लोगों से 14 करोड़ की ठगी की थी।
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आर्थिक अपराध शाखा ने फ्लैट का सपना दिखाकर लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड (एसबीपीएल) के निदेशक को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने प्रौद्योगिकी विज्ञान मंत्रालय में अवर सचिव के पद से नौकरी छोड़कर रियल एस्टेट क्षेत्र में अपना खुद का कारोबार शुरू किया था।
पुलिस उसके फरार सहयोगियों की तलाश कर रही है। शाखा की संयुक्त आयुक्त छाया शर्मा ने बताया कि आरोपी की पहचान कॉमनवेल्थ गांव, अक्षरधाम निवासी दिवाकर शर्मा (64) के रूप में हुई है। जुलाई 2016 में गुलशन सेठी ने शुभकामना बिल्डेटेक प्राइवेट लिमिटेड एवं इसके निदेशकों पीयूष तिवारी और दिवाकर शर्मा के खिलाफ शाखा में शिकायत दर्ज कराई।
जिसमें बताया कि आरोपियों की ओर से जुलाई 2013 में ग्रेटर नोएडा में शुभकामना सिटी बनाया जा रहा था। उन्हें बताया गया कि दो वर्ष में यह परियोजना पूरा कर उन्हें फ्लैट दे दिया जाएगा। समय पूरा होने के बाद भी निवेशकों को फ्लैट नहीं मिला। शाखा के पास ऐसे 60 से ज्यादा शिकायतकर्ताओं ने शिकायत दी। निवेशकों ने करीब 14 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया।
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जांच में पता चला कि आरोपियों ने फ्लैट की बुकिंग परियोजना के अनुमोदन मिलने से पहले ही कर ली थी। पुलिस को यह भी पता चला कि निदेशक पीयूष तिवारी ने एक ही फ्लैट कई लोगों को बेच दिए थे। वर्ष 2006 में यह कंपनी दिवाकर ने ठगी के मकसद से बनाई थी।
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पुलिस उसके फरार सहयोगियों की तलाश कर रही है। शाखा की संयुक्त आयुक्त छाया शर्मा ने बताया कि आरोपी की पहचान कॉमनवेल्थ गांव, अक्षरधाम निवासी दिवाकर शर्मा (64) के रूप में हुई है। जुलाई 2016 में गुलशन सेठी ने शुभकामना बिल्डेटेक प्राइवेट लिमिटेड एवं इसके निदेशकों पीयूष तिवारी और दिवाकर शर्मा के खिलाफ शाखा में शिकायत दर्ज कराई।
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जिसमें बताया कि आरोपियों की ओर से जुलाई 2013 में ग्रेटर नोएडा में शुभकामना सिटी बनाया जा रहा था। उन्हें बताया गया कि दो वर्ष में यह परियोजना पूरा कर उन्हें फ्लैट दे दिया जाएगा। समय पूरा होने के बाद भी निवेशकों को फ्लैट नहीं मिला। शाखा के पास ऐसे 60 से ज्यादा शिकायतकर्ताओं ने शिकायत दी। निवेशकों ने करीब 14 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया।
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जांच में पता चला कि आरोपियों ने फ्लैट की बुकिंग परियोजना के अनुमोदन मिलने से पहले ही कर ली थी। पुलिस को यह भी पता चला कि निदेशक पीयूष तिवारी ने एक ही फ्लैट कई लोगों को बेच दिए थे। वर्ष 2006 में यह कंपनी दिवाकर ने ठगी के मकसद से बनाई थी।
2011 में पीयूष तिवारी इस कंपनी का निदेशक बना। दोनों ने मिलकर लोगों से पैसे इक्ट्ठा किए और फरार हो गए। उप निरीक्षक अमित के नेतृत्व में पुलिस टीम को पता चला कि आरोपी दिवाकर शर्मा फर्जीवाड़ा के एक मामले में मंडोली जेल में बंद है। पुलिस ने अदालत की प्रक्रिया पूरा करने के बाद शनिवार को उसे मंडोली जेल से इस मामले में गिरफ्तार कर लिया। वहीं फरार निदेशक पीयूष तिवारी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर उसकी तलाश कर रही है।
गिरफ्तार आरोपी दिवाकर शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक है। वह कृषि मंत्रालय में कर्मचारी था। इसके बाद प्रौद्योगिकी विज्ञान मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के रूप में काम किया और अवर सचिव के पद से नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने के बाद उसने रियल स्टेट के कारोबार में हाथ आजमाया। बाद में अपने सहयोगी के साथ ठगी करने लगा।
सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए परियोजना बताकर की ठगी
जांच में पता चला कि आरोपियों ने एक विज्ञापन दिया था। जिसमें बताया गया कि परियोजना को सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए लाई गई है। फ्लैटों का कब्जा निर्धारित समय सीमा के भीतर करने का आश्वासन दिया गया। पदाधिकारियों के आश्वासन पर जो सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी, बैंकिंग क्षेत्रों के सेवानिवृत्त अधिकारी समेत आम लोगों ने भी इस परियोजना में करोड़ों रुपये का निवेश किया। मगर आज तक फ्लैटों का निर्माण नहीं हुआ।
गिरफ्तार आरोपी दिवाकर शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक है। वह कृषि मंत्रालय में कर्मचारी था। इसके बाद प्रौद्योगिकी विज्ञान मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के रूप में काम किया और अवर सचिव के पद से नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने के बाद उसने रियल स्टेट के कारोबार में हाथ आजमाया। बाद में अपने सहयोगी के साथ ठगी करने लगा।
सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए परियोजना बताकर की ठगी
जांच में पता चला कि आरोपियों ने एक विज्ञापन दिया था। जिसमें बताया गया कि परियोजना को सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए लाई गई है। फ्लैटों का कब्जा निर्धारित समय सीमा के भीतर करने का आश्वासन दिया गया। पदाधिकारियों के आश्वासन पर जो सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी, बैंकिंग क्षेत्रों के सेवानिवृत्त अधिकारी समेत आम लोगों ने भी इस परियोजना में करोड़ों रुपये का निवेश किया। मगर आज तक फ्लैटों का निर्माण नहीं हुआ।