दिल्ली: केजरीवाल सरकार नए कुओं से बुझाएगी प्रदेश की प्यास, उत्पादन क्षमता 25-30 फीसदी तक बढ़ाई
दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येन्द्र जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सभी घरों को 24 घंटे पीने का साफ पानी पाइप द्वारा मुहैया कराने का वादा किया है। इस वादे को सच्चाई में बदलने की ओर यह एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक रेनी वेल के माध्यम से पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और जल उपचार संयंत्रों को सप्लाई किए जाने वाले पानी की मात्रा में इजाफ़ा होगा।
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दिल्ली सरकार ने नई तकनीक से सोनिया विहार में कुंओं का निर्माण करवाया है। आम कुओं की तुलना में इससे छह से आठ गुना ज्यादा पानी का उत्पादन हो सकेगा। वहीं, आपूर्ति भी 25-30 फीसदी तक बढ़ जाएगी। इससे निकाले पानी को शोधित करने की जरूरत नहीं रहेगी। यह सीधा दिल्ली जल बोर्ड के भूमिगत जलाशयों में जाएगा। वहां से पूर्वी दिल्ली के लोगों तक पहुंचेगा।
पायलेट प्रोजेक्ट के तहत 30 कुंए तैयार हैं। इसके कामयाब होने के बाद अब 70 अन्य कुंओं पर भी सरकार काम करेगी। दिल्ली सरकार 24 घंटे पानी आपूर्ति करने की दिशा में बड़ी कामयाबी मान रही है। मंत्री सत्येंद्र जैन ने मंगलवार को इसका मुआइना किया।
सत्येन्द्र जैन ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सभी घरों को 24 घंटे पीने का साफ पानी पाइप द्वारा मुहैया कराने का वादा किया है। इस वादे को सच्चाई में बदलने की ओर यह एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक रेनी वेल के माध्यम से पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और जल उपचार संयंत्रों को सप्लाई किए जाने वाले पानी की मात्रा में इजाफ़ा होगा। यह कुआं दिल्ली जल बोर्ड, लोक निर्माण विभाग और बाढ़ एवं सिंचाई विभाग के साझा प्रयासों से बनाया गया है।
सत्येंद्र जैन के मुताबिक, पायलट प्रोजेक्ट के तहत 30 कुएं बनाए गए। इसका मकसद यह जानना था कि क्या नए और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके पानी की उपलब्धता को बढ़ाया जा सकता है या नहीं। उन्होने बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट 100 फीसद सफल रहा। अब ऐसे 70 और कुएं परिसर में बनाएगी।
उन्होंने बताया कि इन आधुनिक कुओं की मदद से हमें प्रति दिन 1.2 से 1.6 मिलियन गैलन पानी उपलब्ध होगा, जो एक आम ट्यूबवेल के मुकाबले छह से आठ गुना ज्यादा है। इसके बन जाने से पूर्वी दिल्ली में अब पानी की सप्लाई 25-30 फीसद तक बढ़ जाएगी।
अत्याधुनिक कुएं इस तरह करते हैं काम
डिजाइन और निर्माण सामग्री में बदलाव करके आधुनिक कुओं को तैयार किया गया है। इससे पानी कुएं के भीतर ही उपचारित हो जाए। नतीजा नया वॉटर ट्रीटमंट प्लांट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इनके बनने से अब पानी की सप्लाई 25-30 फीसद बढ़ जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि इससे भूजल स्तर पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इन नए कुओं का सिस्टम इस तरह का है कि बारिश के मौसम में ये खुद-ब-खुद भूजल को दोबारा से रीचार्ज कर सकेंगे। इस कुएं का व्यास 1-1.5 मीटर और गहराई 30 मीटर है। साधारण कुओं में ये 0.3 मीटर होता है।