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Delhi : हाईकोर्ट की टिप्पणी- यह मानना मुश्किल है कि मुस्लिमों की भीड़ में लगे 'जय श्रीराम' के नारे, तीन बरी

Fri, 09 Jun 2023 02:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 09 Jun 2023 02:05 AM IST
सार

अदालत ने बिना जांच के मामले में कई शिकायतों को जोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है।अदालत ने मुख्य शिकायत में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया और गलत तरीके से क्लब की गई शिकायतों से संबंधित मामले को जांच एजेंसी को वापस भेज दिया।

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Delhi: Court said It is difficult to believe that the slogans of 'Jai Shri Ram' were raised in the crowd of Mu
delhi high court - फोटो : ANI

विस्तार

अदालत ने पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में एक ही समुदाय विशेष के तीन आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने बिना जांच के मामले में कई शिकायतों को जोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है।अदालत ने मुख्य शिकायत में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया और गलत तरीके से क्लब की गई शिकायतों से संबंधित मामले को जांच एजेंसी को वापस भेज दिया।

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कडकड़ढूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने कहा कि चंदू नगर, करावल नगर रोड स्थित एक दुकान पर हुई घटना के संबंध में अकील अहमद, रहीश खान और इरशाद के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं होते हैं।
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अदालत ने अभियोजन पक्ष के उस तर्क पर भी संदेह जाया कि भीड़ जय श्री राम के नारे लगा रही थी। अदालत ने कहा कि एक समुदायर विशेष के लोगों की भीड़ जय श्री राम'''' का नारा लगाएगी, यह मानना मुश्किल है। इससे स्पष्ट है कि पुलिस ने मामलों की ठीक से जांच नहीं की और कई मामलों को एक साथ जोड़ कर जांच की खानापूर्ति की है।
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अदालत ने कहा कि चार्जशीट में जांच अधिकारी ने इस मामले में 27 शिकायतों को एक साथ जोड़े जाने का उल्लेख किया है। हालांकि, चार्जशीट में उल्लिखित शिकायतों की सूची के अवलोकन पर, यह पाया जा सकता है कि तीन शिकायतकर्ताओं के नाम सूची में दो बार उल्लेखित थे।

इसके अलावा क्रम संख्या में इस अर्थ में विसंगति थी कि क्रम संख्या 14 के बाद कोई क्रम संख्या 15 नहीं थी और सीधे सूची में क्रम संख्या 16 दी गई थी। इस प्रकार, यह सूची प्रभावी रूप से 23 अतिरिक्त शिकायतों को संदर्भित करती है, जिन्हें इस प्राथमिकी में ही जांच के लिए लिया गया था। अदालत ने कहा कि आईओ 27 शिकायतों को इंगित नहीं कर सका जब उसकी जिरह की गई थी।

अदालत ने आगे कहा कि इन घटनाओं के संबंध में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ अतिरिक्त शिकायतों और सबूतों पर की गई जांच के पहलू पर अधिक पूछताछ के बाद आईओ ने आखिरकार जवाब दिया कि उन्हें परिसर में घटना के संबंध में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ सबूत मिले हैं। अदालत ने कहा कि उन्होंने इस मामले में अन्य शिकायतों को दानिश की शिकायत के साथ जोड़ दिया था क्योंकि घटना स्थल भी दानिश के परिसर से लगभग 100 से 300 मीटर की दूरी पर स्थित थे। इसके बाद उन्होंने आगे कहा कि आसिफ की शिकायत के अनुसार घटना स्थल दानिश के परिसर से लगभग 300-400 मीटर की दूरी पर था।

न्यायाधीश ने आगे कहा कि आईओ को उन शिकायतों को वर्तमान प्राथमिकी में जोड़ने के लिए पुलिस अधिकारी के साथ संबंध की जानकारी भी नहीं थी। मामले में एक दानिश ने शिकायत की थी कि उसकी दुकान, कूरियर सेवा कार्यालय को लूट लिया गया और जला दिया गया, जिससे उसे 6-7 लाख रुपये का नुकसान हुआ। दयालपुर थाना पुलिस ने बाद में जगह और घटना की तारीख की निकटता के आधार पर दानिश की शिकायत के साथ और अधिक शिकायतों को जोड़ दिया।

अदालत ने कहा दानिश की दुकान पर हुई घटना सहित चार्जशीट में वर्णित सभी घटनाओं के संबंध में घटना की कोई समय अवधि का उल्लेख नहीं किया गया है। "यह अज्ञात समय पर हुआ दिखाया गया था। अदालत ने आगे कहा कि कांस्टेबल पीयूष ने कहा कि चंदू नगर के सामने करावल नगर रोड पर लगभग 1500-2000 लोगों का जमावड़ा था और वे लोग सीएए/एनआरसी के खिलाफ नारे लगा रहे थे और आसपास की दुकानों में तोड़फोड़ कर रहे थे।


सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वे घटना के दिन मौके पर मौजूद नहीं थे और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। अकील अहमद की और से पेश अधिवक्ता महमूद प्राचा ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने गवाहों को जमा करने का प्रयास किया और अभियुक्तों के खिलाफ गलत उद्देश्यों के साथ सनसनीखेज और अतिरंजित आरोप लगाए।

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