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Delhi News: देश की सर्वोच्च रेटिंग पाने वाली शतरंज खिलाड़ी बनी आरिनी लाहोटी
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विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को खेलते देखकर शतरंज के मोहरों के प्रति हुई थी आकर्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। ब्लूबेल्स स्कूल इंटरनेशनल की पांच वर्षीय छात्रा आरिनी लाहोटी ने शतरंज की दुनिया में अपनी शानदार प्रतिभा से सबका ध्यान खींचा है। 1553 की प्रभावशाली फाइड रेटिंग के साथ, आरिनी देश की सर्वोच्च रेटिंग प्राप्त शतरंज खिलाड़ी बन गई हैं। उसकी यह उपलब्धि न केवल उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि स्कूल की खेल और शिक्षा के प्रति समग्र दृष्टिकोण की सफलता को भी बता रही है। आरिनी की शतरंज यात्रा तब शुरू हुई, जब उसने विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को खेलते देखा और शतरंज के मोहरों के प्रति आकर्षित हुईं। अपने पिता और स्कूल के शतरंज कोच सुरेंद्र लाहोटी के मार्गदर्शन में आरिनी ने खेल की बारीकियों को आत्मसात किया और कम उम्र में ही उल्लेखनीय कौशल विकसित किया।
स्कूल के प्राचार्य ने कहा कि आरिनी की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ब्लूबेल्स के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है जो छात्रों को आत्मविश्वास, अनुशासन और वैश्विक मंचों पर प्रभाव छोड़ने के लिए प्रेरित करता है। आरिनी की उपलब्धि उनके लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि आरिनी की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और समर्थन के साथ, कोई भी बच्चा असाधारण ऊंचाइयों को छू सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। ब्लूबेल्स स्कूल इंटरनेशनल की पांच वर्षीय छात्रा आरिनी लाहोटी ने शतरंज की दुनिया में अपनी शानदार प्रतिभा से सबका ध्यान खींचा है। 1553 की प्रभावशाली फाइड रेटिंग के साथ, आरिनी देश की सर्वोच्च रेटिंग प्राप्त शतरंज खिलाड़ी बन गई हैं। उसकी यह उपलब्धि न केवल उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि स्कूल की खेल और शिक्षा के प्रति समग्र दृष्टिकोण की सफलता को भी बता रही है। आरिनी की शतरंज यात्रा तब शुरू हुई, जब उसने विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को खेलते देखा और शतरंज के मोहरों के प्रति आकर्षित हुईं। अपने पिता और स्कूल के शतरंज कोच सुरेंद्र लाहोटी के मार्गदर्शन में आरिनी ने खेल की बारीकियों को आत्मसात किया और कम उम्र में ही उल्लेखनीय कौशल विकसित किया।
स्कूल के प्राचार्य ने कहा कि आरिनी की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह ब्लूबेल्स के उस दृष्टिकोण को दर्शाती है जो छात्रों को आत्मविश्वास, अनुशासन और वैश्विक मंचों पर प्रभाव छोड़ने के लिए प्रेरित करता है। आरिनी की उपलब्धि उनके लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि आरिनी की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और समर्थन के साथ, कोई भी बच्चा असाधारण ऊंचाइयों को छू सकता है।
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