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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Young people are becoming victims of kidney cancer due to smoking, obesity and blood pressure.

Delhi NCR News: धूम्रपान, मोटापा, रक्तचाप से युवा हो रहे किडनी कैंसर का शिकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jun 2024 06:32 PM IST
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विश्व किडनी कैंसर दिवस
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10 साल पहले तक 60 साल के बाद मिलते थे मरीज
अब आंकड़ा 45 साल तक पहुंचा, प्रदूषण से समस्या हुई और गंभीर
राकेश शर्मा
नई दिल्ली। बढ़ते धूम्रपान की आदत, मोटापा और उच्च रक्तचाप की समस्या से युवा किडनी कैंसर का शिकार हो रहे हैं। वहीं मेट्रो शहराें में बढ़ते प्रदूषण के कारण यह समस्या और विकराल हो गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि 10 साल पहले तक दिल्ली के अस्पतालों में आने वाले 90 फीसदी से अधिक मरीज 60 साल से ऊपर की आयु के होते थे। समय के साथ लोगों की जीवनशैली खराब हुई। साथ ही धूम्रपान को आदत में शुमार किया। इस सभी कारकों के कारण अब अस्पताल में आ रहे 40 फीसदी से अधिक मरीज 40 से 50 साल के हैं। जबकि 10 साल पहले यह आंकड़ा 10 फीसदी से भी कम था।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. हेमंत कुमार गोयल ने बताया कि 10 साल पहले तक 90 फीसदी मरीज 60 साल से अधिक आयु के होते थे,लेकिन मौजूदा समय में 60 साल से अधिक आयु के मरीजों की संख्या घटकर 60 फीसदी तक रह गई है। करीब 40 फीसदी मरीज 40 से 50 साल की आयु में आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज एडवांस स्टेज के होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती दौर में इसका लक्षण नहीं दिखता।
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इन बातों का रखें ध्यान
50 की उम्र के बाद करवाएं अल्ट्रासाउंड
- पेट या कमर में दर्द हो, पेशाब में खून आए तो हो जाए सतर्क
धूम्रपान, मोटापा, उच्च रक्तचाप से पीड़ित 40 के बाद करवाएं जांच
- जिनके परिवार में इस बीमारी से कोई पीड़ित रहा हो तो 40 के बाद जांच करवाएं


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हो सकता है 100 फीसदी ठीक
किडनी का कैंसर यदि शुरुआती दौर में पकड़ में आ जाए तो 100 फीसदी ठीक हो सकता है। देरी से पकड़ में आने पर समस्या बढ़ जाती है। ठीक होने की दर केवल पांच फीसदी ही रहती है।
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पुरुषों में होने की आशंका तीन गुना
सफदरजंग अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. हिमांशु वर्मा ने बताया कि महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में किडनी कैंसर होने की आशंका तीन गुना अधिक होती है।


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केस स्टडी
सफदरजंग अस्पताल में करीब 45 साल का एक मरीज पेशाब में खून आने व दूसरी शिकायत के साथ इलाज करवाने पहुंचा। नेफ्रोलॉजी विभाग में डॉ. हिमांशु वर्मा की टीम ने उनकी जांच की। जांच में पाया गया कि मरीज के पास केवल एक किडनी है। उनमें भी कैंसर बन गया है। यह केस काफी चुनौती भरा था। मरीज की किडनी निकाली नहीं जा सकती थी। ऐसे में उसे अस्पताल में ही भर्ती किया गया और पूरी जांच के बाद कैंसर प्रभावित किडनी के उक्त हिस्से को निकाल दिया गया। सर्जरी के बाद मरीज डायलिसिस पर आ गया। दो माह तक मरीज को अस्पताल में भर्ती रखा गया। इस दौरान धीरे-धीरे यूरिन पास होने लगा। बाद में पूरी जांच के बाद जब डॉक्टर ने उसे छुट्टी दे दी। मौजूदा समय में वह जिंदगी सामान्य जी रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि यह केस शुरुआती दौर का था। यदि मरीज एडवांस स्टेज में आता तो बचाना मुश्किल हो जाता।
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