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हाईकोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 16 Aug 2018 10:57 PM IST
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फाइल फोटो
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हाईकोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व पूर्व अध्यक्ष सोनिया के अलावा ऑस्कर फर्नानडिस की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया। इन नेताओं ने आयकर विभाग द्वारा इनकी आय का दोबारा आंकलन करने के फैसले को चुनौती दी थी।
जस्टिस एस. रविंद्र भट व जस्टिस एके चावला की खंडपीठ ने आयकर विभाग तथा राहुल व सोनिया के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फैसला 10 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया। साथ ही फैसला आने तक इन नेताओं पर कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया है।
आयकर विभाग की ओर से दलीलों का जवाब देते हुए एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि गैर लाभ वाली कंपनी की आड़ में मनी लांड्रिंग जैसे अवैध कार्य भी किया जा सकता है।
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इसलिए यह कहना गलत है कि यंग इंडियन के शेयर खरीदने से याचिकाकर्ताओं को कोई लाभ नहीं हुआ है। एएसजी मेहता ने कोर्ट के समक्ष कहा कि इन नेताओं ने 2010 में यंग इंडियन कंपनी का गठन किया गया था।
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जस्टिस एस. रविंद्र भट व जस्टिस एके चावला की खंडपीठ ने आयकर विभाग तथा राहुल व सोनिया के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फैसला 10 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया। साथ ही फैसला आने तक इन नेताओं पर कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया है।
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आयकर विभाग की ओर से दलीलों का जवाब देते हुए एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि गैर लाभ वाली कंपनी की आड़ में मनी लांड्रिंग जैसे अवैध कार्य भी किया जा सकता है।
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इसलिए यह कहना गलत है कि यंग इंडियन के शेयर खरीदने से याचिकाकर्ताओं को कोई लाभ नहीं हुआ है। एएसजी मेहता ने कोर्ट के समक्ष कहा कि इन नेताओं ने 2010 में यंग इंडियन कंपनी का गठन किया गया था।
22 जनवरी 2011 को कंपनी के शेयर 100 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदे थे लेकिन उस समय इन शेयरों का बाजार भाव कहीं ज्यादा था। इन दोनों भावों के अंतर से इन नेताओं को फायदा हुआ था।
साथ ही कहा कि गैर लाभ वाली कंपनी के शेयर कोई धारक बेचता है तो कंपनी का ऑडिटर इनके मूल्य का निर्धारण बाजार भाव पर करता है। इस लेनदेन से शेयर धारक को जाहिर तौर पर फायदा होता है। इसलिए इन नेताओं की आय का दोबारा आंकलन करना जरूरी है।
पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने कहा कि आयकर विभाग की कार्रवाई बदनीयती से प्रेरित थी। इस मामले की पड़ताल 2014 से चल रही थी लेकिन इसका नोटिस चार साल बाद 31 मार्च 2018 की रात को दिया गया।
साथ ही कहा कि गैर लाभ वाली कंपनी के शेयर कोई धारक बेचता है तो कंपनी का ऑडिटर इनके मूल्य का निर्धारण बाजार भाव पर करता है। इस लेनदेन से शेयर धारक को जाहिर तौर पर फायदा होता है। इसलिए इन नेताओं की आय का दोबारा आंकलन करना जरूरी है।
पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने कहा कि आयकर विभाग की कार्रवाई बदनीयती से प्रेरित थी। इस मामले की पड़ताल 2014 से चल रही थी लेकिन इसका नोटिस चार साल बाद 31 मार्च 2018 की रात को दिया गया।
एजेएल को दिए 90 करोड़ के कर्ज को बोगस बताने का विरोध करते हुए चिदंबरम ने कहा यह कर्ज नौ-दस साल की अवधि में137 चेक जारी कर दिया गया था। अगर यह कर्ज बोगस था तो यंग इंडियन की आय 407 करोड़ कैसे हो गई।
कोर्ट के समक्ष एक घंटे से ज्यादा समय तक चली बहस में चिदंबरम ने कहा कि सोनिया गांधी ने 22 जनवरी 2011 को यंग इंडियन के 1900 शेयर खरीदे थे।
अगर मान भी ले कि यंग इंडियन ने 90 करोड़ के कर्ज को शेयरों में बदल दिया था तब भी इससे किसी शेयर धारक कोई आय नहीं होती। अगर कंपनी को आय हुई थी तो भी यह उस वित्त वर्ष 2011-12 में शेयर धारकों की आय नहीं थी।
कोर्ट के समक्ष एक घंटे से ज्यादा समय तक चली बहस में चिदंबरम ने कहा कि सोनिया गांधी ने 22 जनवरी 2011 को यंग इंडियन के 1900 शेयर खरीदे थे।
अगर मान भी ले कि यंग इंडियन ने 90 करोड़ के कर्ज को शेयरों में बदल दिया था तब भी इससे किसी शेयर धारक कोई आय नहीं होती। अगर कंपनी को आय हुई थी तो भी यह उस वित्त वर्ष 2011-12 में शेयर धारकों की आय नहीं थी।