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Year Ender: दिल्ली दंगा तो कभी कोरोना और अब किसान धरना ने व्यापार को नहीं भरने दी उड़ान
Tue, 29 Dec 2020 12:46 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 29 Dec 2020 12:46 AM IST
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दिल्ली दंगा, कोरोना और किसान आंदोलन
- फोटो : amar ujala
कभी दिल्ली में दंगा तो फिर कोरोना और अब किसानों के आंदोलन ने व्यापार को उड़ान नहीं भरने दिया। कोरोना की वजह से लॉकडाउन और फिर मजदूरों के पलायन ने दिल्ली की औद्योगिक रफ्तार को तो रोका ही साथ ही खुदरा व्यापार भी अति आवश्यक वस्तुओं को छोड़ पटरी पर नहीं लौट सका।
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त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी, लेकिन साल के अंत में पंजाब और दिल्ली के बॉर्डर पर किसान आंदोलन की वजह से आर्थिक व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पाई। नये साल में दिल्ली के उद्यमियों व व्यापारियों को कोरोना के टीके से उम्मीद है। हालांकि 2020 के नुकसान की भरपाई करना चुनौती से कम नहीं है।
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2020 से उम्मीद
1. व्यापारियों को कोरोना के टीके से उम्मीद है। टीका लगने से कोरोना महामारी पर लगाम लग जाए तो फिर व्यापार पटरी पर लौटेगी, नहीं तो नया साल में भी आर्थिक व्यवस्था की कमर टूटी ही रहेगी।
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2. अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रतिस्पद्र्धा बढने की उम्मीद है। स्वदेशी को बढ़ावा देने वाली नीति से लघु उद्योग के साथ ही बड़े उद्योग-धंधा चलाने वालों को भी राहत मिलेगी।
3. चीन के साथ व्यापार कम हुआ तो भारतीय उद्योग बेहतर स्थिति में होंगे। प्रोडक्शन भी बढ़ेगा और रोजगार में भी इजाफा होगा। इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय व्यापारी अपनी धमक बढ़ा सकेंगे।
4. पलायन कर गए मजदूर वापस आएंगे। पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा तो रोजगार का श्रृजन होगा। रोजगार बढ़ेगा तो खरीदारी होगी। मांग और आपूर्ति की व्यवस्थाएं ठीक रहेंगी तो आर्थिक स्थिति में भी चार चांद लगेगा।
5. बाजार में ग्राहक, होटल में टूरिस्ट, पर्यटन स्थलों पर आवाजाही, यातायात व्यवस्था सुगम होने की उम्मीद है। दिल्ली आने से कतराने वाले ग्राहक फिर से उसी दुकान से व्यापार शुरू करे, जहां से वह कोविड के पहले करते थे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो ताकि फिर से महामारी की वजह से लॉक डाउन की स्थिति नहीं बने। कोरोना का टीका कारगर साबित हो। लोग घरों से बाहर निकल सके। यातायात के सभी संसाधन पूर्ववत स्थिति में चल सके।
2020 की उपलब्धियां
. मूलभूत आवश्यकता की चीजों में व्यापारियों ने कमी नहीं होने दी।
. लॉकडाउन के दौरान मूल्यों की बेतहाशा बृदिध नहीं हुई।
. अनलॉक में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते व कराते हुए बाजार को खोलना।
. पलायन कर गए मजदूरों को फिर से वापस बुलाना।
. उद्योग-धंधा को कोरोना के संक्रमण के बीच खोलना व प्रोडक्शन करना।
. संक्रमण के काल में ग्राहकों के साथ अपने को संक्रमण से बचा कर रखना।
दुनिया आशा की है निराशा की नहीं
दुनिया आशा की है, निराशा की नहीं है। उम्मीद है कि नये साल में कोरोना का टीका सभी को लग जाए। हड़ताल, दंगा, कोविड से छुटकारा मिले ताकि अर्थ व्यवस्था बेहतर स्थिति में पहुंच सके। लॉकडाउन के दौरान टूटे हुए मोमेंटम को वापस लाने की कोशिश होनी चाहिए। बिगड़ी हुई आर्थिक स्थिति की वजह से बेपटरी हुई व्यवस्था पटरी पर दिखनी शुरू हो जाए।
संजीव मेहरा, दिल्ली रिटेल ट्रेड फोरम के अध्यक्ष
स्वदेशी को बढ़ावा देने से बढ़ी उम्मीद
केंद्र सरकार की स्वदेशी को बढ़ावा देने की नीति से व्यापार में बेहतरी की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भारतीय माल की धमक बढ़ेगी। इस वजह से भारत में प्रोडक्शन होने वाले चीजों की गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी। डिमांड एंड सप्लाई का चेन बनने से बेहतर स्थिति व्यापार की होगी। सरकार को इसके लिए व्यापारियों से समन्वय बैठा कर बढ़ावा देने का प्रयास करना होगा।
-राजीव बत्रा, टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव