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चुनाव तक यमुना माफियाओं के हवाले
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sat, 29 Mar 2014 01:51 AM IST
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लोकसभा चुनाव की व्यस्तता के चलते अफसर लोनी में चल रहे अवैध खनन को भूल चुके हैं। इससे खनन माफिया की पौ बारह हो गई है। माइनिंग कानून की धज्जियां उड़ाते हुए खनन माफिया यमुना की कोख को खोखली कर रहे हैं। यमुना नदी के डूब क्षेत्र में करोड़ों के खनन का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
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पुलिस तमाशबीन बनी हुई है और असलहाधारी दबंग खनन क्षेत्र की चौकसी में लगे हैं। शाम होते ही खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं और बालू से भरे वाहन सड़कों पर सरपट दौड़ने लगते हैं। यह गोरखधंधा शाम से लेकर अगले दिन तड़के 3-4 बजे तक चलता है।
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रात में यमुना के सन्नाटे को चीरती हुई 18-20 जेसीबी मशीनें पचायरा के पास ट्रकों में बालू भरती हैं। असलहाधारी दबंग कारों-बाइकों पर सवार होकर खनन क्षेत्र में निगरानी करते रहते हैं।
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18-20 ट्रक इकट्ठे होने के बाद ट्रक ट्रॉनिका सिटी में खड़े होते हैं और फिर एक-एक कर गंतव्य को जाते हैं। जो लंबे रूट पर जाते हैं, उन ट्रकों को तिरपाल से ढककर भेजा जाता है। ट्रकों के अलावा ट्रैक्टर-ट्रलियों में भी खनन का रेत भरकर ले जाया जा रहा है।
रास्ते में जगह-जगह बालू से भरी ट्रालियां खड़ी रहती हैं। हालात ये हैं कि गाजियाबाद के एसएसपी रहे धर्मेंद्र सिंह के हटने के पीछे भी खनन माफियाओं का हाथ माना जा रहा है।
पिछले साल केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की ओर से गठित जांच कमेटी ने राज्य सरकारों को सिफारिशें भेजी थीं, जिसमें था कि बालू खनन के लिए नदी के किनारे क्षेत्र विशेष की पहचान की जानी चाहिए। सुरक्षा जोन तय करें। नदी के बहाव क्षेत्र में खनन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।