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यमुना विकास प्राधिकरणः 126 करोड़ के भूमि घोटाले में बड़ी कार्रवाई, पूर्व एसीईओ गिरफ्तार
Mon, 16 Dec 2019 05:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 16 Dec 2019 05:03 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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यमुना विकास प्राधिकरण (यीडा) के 126 करोड़ के भूमि घोटाले में पुलिस ने रविवार को यीडा के तत्कालीन एसीईओ सतीश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में यह पूर्व आईएएस व सीईओ पीसी गुप्ता के बाद दूसरी सबसे बड़ी गिरफ्तारी है। पुलिस ने सतीश के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई शुरू की थी।
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इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जबकि 6 अन्य आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया है। अभी इस मामले में 12 पूर्व अधिकारियों समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना बाकी है।
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यमुना प्राधिकरण के भूमि घोटाले के मामले में 3 जून 2018 को कासना कोतवाली में पूर्व सीईओ व आईएएस पीसी गुप्ता समेत 21 आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पीसी गुप्ता को 22 जून को मध्य प्रदेश के दतिया से गिरफ्तार कर दस दिन की रिमांड पर लेने के बाद मेरठ की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में पेश कर जेल भेजा था।
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पीसी गुप्ता अब तक मेरठ जेल में बंद बताए गए हैं। उस दौरान केस की जांच तत्कालीन ग्रेटर नोएडा प्रथम सीओ अमित किशोर श्रीवास्तव कर रहे थे। उनके ट्रांसफर के बाद जांच सीओ निशांक शर्मा ने शुरू की थी।
केस की जांच में छह कंपनियों समेत कई और अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। पुलिस ने दावा किया था केस में 36 से अधिक आरोपियों के नाम सामने आ चुके हुए थे। अब बीटा-2 थाना पुलिस ने एसीईओ सतीश कुमार को गिरफ्तार किया है।
1989 बैच के पीसीएस टॉपर थे सतीश
सतीश कुमार मूलरूप से शामली के अछोया गांव के रहने वाले हैं और फिलहाल ओमीक्रान-1 की सुपरटेक जार सोसायटी में रह रहे थे। वह 1989 बैच के पीसीएस अधिकारी थे। उन्होंने अपने बैच में टॉप किया था।
रिश्वतकांड के बाद ठंडा पड़ा था मामला
एसएसपी वैभव कृष्ण ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई केस अपने हाथ में लेने से पहले प्राथमिक पड़ताल कर रही थी। इसी दौरान गाजियाबाद में आरोपियों को मदद पहुंचाने की एवज में रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई इंस्पेक्टर वीएस राठौर रंगेहाथ पकड़ा गया था। बाद में इस मामले में सीबीआई के एएसआई सुनील दत्त की भी गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद से यह मामला ठंडा पड़ा था।
शासन ने दिए थे 14 अधिकारियों पर कार्रवाई को आदेश
केस में कई तत्कालीन अधिकारियों के घोटाले में शामिल होने के कारण अफसरों ने कार्रवाई के लिए शासन से मंजूरी मांगी थी। अभी हाल में ही शासन ने पीसी गुप्ता (सीईओ), वीपी सिंह (ओएसडी), सतीश कुमार (एसीईओ), अजीत पारेश, राजेश शुक्ला, रणवीर सिंह सुरेश चंद्र (सभी तहसीलदार) चमन सिंह नायब (तहसीलदार), पंकज कुमार (लेखपाल), अतुल कुमार (प्लानिंग मैनेजर), एमपी सिंह (लेखाकार), लाजपत राय और अरविंद मोहन (मैनेजर), सरजैदी (जीएम फाइनेंस) पर कार्रवाई को मंजूरी दी। इसके बाद पुलिस अलर्ट हुई और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दीं गईं। अभी अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी को दबिश जारी है।
सतीश ने भूमि घोटाले की पत्रावालियों पर किए थे हस्ताक्षर
पुलिस के मुताबिक, सतीश कुमार 18 अप्रैल 2013 से 13 जुलाई 2015 तक यमुना प्राधिकरण में एसीईओ के पद पर थे। इस दौरान उन्होंने भूमि घोटाले से संबंधित क्रय, विक्रय व चिह्नीकरण की पत्रावलियों पर हस्ताक्षर किए थे। पुलिस के मुताबिक, अब तक की जांच में सामने आया है कि पूर्व आईएएस सीईओ पीसी गुप्ता ने एसीईओ सतीश कुमार व अन्य सहयोगी अधिकारियों के साथ मिलकर अपने रिश्तेदारों, करीबियों के माध्यम से ऐसी भूमि सस्ते मे खरीदवाई जो प्राधिकरण के किसी प्रयोग में आने योग्य नहीं थी और उसी को चिह्नित कर दोगुनी कीमत पर खरीद लिया गया।