यादव सिंह के सहायक रामेंद्र ने सीबीआई से किया ये अहम खुलासा
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नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के जूनियर सहायक रामेंद्र ने सीबीआई की पूछताछ में पैसे की लेनदेन के संबंध में कई अहम खुलासे किए हैं।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के जूनियर सहायक रामेंद्र ने सीबीआई की पूछताछ में पैसे के लेनदेन के संबंध में कई अहम खुलासे किए हैं।
रामेंद्र नोएडा का असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर है जिसे सीबीआई ने इस महीने की शुरुआत में पूछताछ के लिए बुलाया था। रामेंद्र सीधे यादव सिंह को रिपोर्ट करता था।
एंट्री बड़ी बारीकी से डायरी में की जाती थी
सूत्रों के मुताबिक अफसरशाही और राजनीतिक स्तर पर पैसे के लेनदेन की एंट्री बड़ी बारीकी से एक डायरी में की जाती थी, जिसे आयकर विभाग (आईटी) ने छापामारी में बरामद किया था।
सूत्रों ने बताया कि डायरी में एंट्री रामेंद्र के हाथों ही होती थी। रामेंद्र ने सीबीआई को बताया है कि किस तरह बिल्डरों और ठेकेदारों से पैसे लिए जाते थे और उसे आगे कहां पहुंचाया जाता था।
डायरी में कई कोड में एंट्री की गई है जिसका ब्योरा देने में यादव सिंह आनाकानी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक रामेंद्र ने इस बारे में कई अहम जानकारी दी है।
अधिकारी करते थे घूस रकम इकट्ठा
उसने बताया है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के किन-किन अधिकारियों को घूस की रकम इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। यह भी बताया कि यह रकम आगे किस चैनल से जाती थी।
सीबीआई इस आधार पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। रामेंद्र ने बताया है कि किसी भी ठेके का 5 से 10 प्रतिशत रकम घूस के तौर पर तय की जाती थी, जिसका भुगतान शुरू में ही करना होता था।
गौरतलब है कि यादव सिंह के हाथों करीब 8000 करोड़ के ठेके दिए गए। रामेंद्र ने बताया कि घूस की रकम का बंटवारा सिर्फ ऊपर के अधिकारियों और राजनीतिक स्तर तक ही नहीं पहुंचता था, बल्कि निचले अधिकारियों को भी दिया जाता था।
इसके लिए हरेक स्तर के अधिकारी का प्रतिशत तय था। बड़े ठेके के मामले में निचले अधिकारियों को 10 से 50 लाख तक की रकम भी दी गई है।