विश्व स्वास्थ्य दिवस विशेष: देश में बढ़ रही मानसिक रोगियों की संख्या
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यदि आप किसी शारीरिक बीमारी से परेशान हैं तो हो संभव है कि आप मानसिक रोग से पीड़ित हों। देश-विदेश में हुए अलग-अलग अध्ययनों में यह सामने आया है कि शारीरिक बीमारी से पीड़ित करीब एक तिहाई मरीज मानसिक रोग से भी पीड़ित है लेकिन ऐसे मरीजों की पहचान नहीं हो पाती।
लिहाजा वे बिना इलाज के रह जाते हैं। यही कारण है कि देश की एक बड़ी आबादी किसी न किसी तरह के मानसिक रोग से पीड़ित है और ऐसे मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि भी हो रही है।
मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और इसकी वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आती जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित व्यक्ति कई दूसरी बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।
हृदय संबंधी बीमारी और रिमोट्यॉड ऑर्थराइटिस के मरीजों के लिए मानसिक रोग और भी घातक होता है। मानसिक रूप से बीमार लोग इन्फर्टिलिटी से भी पीड़ित होते हैं।
डिप्रेशन से महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता बाधित होती है
इंदिरा आईवीएफ अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. अरविंद वेद ने बताया कि जब कोई महिला अवसाद या अत्यधिक तनाव के दौर से गुजरती है तो उसकी सामान्य गर्भधारण की क्षमता बाधित हो सकती है। यही स्थिति पुरुषों में भी देखी गई है, अत्यधिक तनाव की वजह से पुरुष में स्पर्म काउंट कम हो जाता है।
दिल्ली सरकार के इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (इहबास) के निदेशक डॉ. निमेश देसाई ने बताया कि अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित 30 से 40 फीसदी मरीज मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित होते है।
डॉ. देसाई का कहना है कि ऐसे मरीजों में अवसाद होने का पता चिकित्सक भी नहीं लगा पाते हैं, क्योंकि देश में प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी है। डॉ. देसाई का कहना है बीमारी की पहचान के लिए प्रशिक्षित चिकित्सकों की फौज तैयार करनी होगी तभी इस पर काबू पाया जा सकेगा।