{"_id":"69690a5b238c43e2ef0455c9","slug":"workshop-on-developing-learners-glossary-of-social-sciences-from-english-to-hindi-concludes-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-120306-2026-01-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: अंग्रेजी से हिंदी में शब्दावली तैयार करने पर हुई पांच दिवसीय चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: अंग्रेजी से हिंदी में शब्दावली तैयार करने पर हुई पांच दिवसीय चर्चा
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में अंग्रेजी से हिंदी में सामाजिक विज्ञान की लर्नर्स शब्दकोष विकसित पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ। यह कार्यशाला शिक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग के तत्वावधान में जामिया के राजनीति विज्ञान विभाग के सहयोग से हुई थी। इस अवसर पर जामिया के कुलपति प्रो मजहर आसिफ ने औपनिवेशिक अतीत से दिमाग को आजाद करने में हिंदी और भारतीय भाषाओं की भूमिका पर जोर दिया।
कुलपति ने कहा कि हमें भारतीय ज्ञान प्रणाली को प्राथमिकता देकर इसे तुरंत ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दों का अनुवाद करना अनुवाद की भावना के साथ न्याय नहीं हो सकता है। शब्दावली का अनुवाद करते समय भूगोल, इतिहास और संस्कृति को संदर्भ में रखना होगा, चाहे वह आठवीं अनुसूची की भाषाएं हों या कोई अन्य भाषा।
उन्होंने समिति के सदस्यों को सलाह दी कि वे प्रामाणिक अनुवाद की सीमाओं का ध्यान रखें, चाहे वह भारत में बोली और लिखी जाने वाली कोई भी भाषा हो। प्रोफेसर आसिफ़ ने तेरह विशेषज्ञ सदस्यों की टीम द्वारा किए गए काम की सराहना की, जिन्होंने सोशल साइंस में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी और वैज्ञानिक शब्दों की शब्दावली को हिंदी में तैयार करने का काम किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में अंग्रेजी से हिंदी में सामाजिक विज्ञान की लर्नर्स शब्दकोष विकसित पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ। यह कार्यशाला शिक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग के तत्वावधान में जामिया के राजनीति विज्ञान विभाग के सहयोग से हुई थी। इस अवसर पर जामिया के कुलपति प्रो मजहर आसिफ ने औपनिवेशिक अतीत से दिमाग को आजाद करने में हिंदी और भारतीय भाषाओं की भूमिका पर जोर दिया।
कुलपति ने कहा कि हमें भारतीय ज्ञान प्रणाली को प्राथमिकता देकर इसे तुरंत ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दों का अनुवाद करना अनुवाद की भावना के साथ न्याय नहीं हो सकता है। शब्दावली का अनुवाद करते समय भूगोल, इतिहास और संस्कृति को संदर्भ में रखना होगा, चाहे वह आठवीं अनुसूची की भाषाएं हों या कोई अन्य भाषा।
विज्ञापन
उन्होंने समिति के सदस्यों को सलाह दी कि वे प्रामाणिक अनुवाद की सीमाओं का ध्यान रखें, चाहे वह भारत में बोली और लिखी जाने वाली कोई भी भाषा हो। प्रोफेसर आसिफ़ ने तेरह विशेषज्ञ सदस्यों की टीम द्वारा किए गए काम की सराहना की, जिन्होंने सोशल साइंस में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी और वैज्ञानिक शब्दों की शब्दावली को हिंदी में तैयार करने का काम किया है।
विज्ञापन