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पत्नी के कामकाजी होने से बच्चों के खर्च से नहीं बच सकता पिता

Tue, 02 Jul 2019 06:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 02 Jul 2019 06:35 AM IST
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working wife not an excuse for father to escape from expenses of children
DELHI HIGH COURT
बच्चों की मां नौकरी कर रही है, इसलिए उनका पिता गुजारा भत्ता देने से बच नहीं सकता। बच्चों के पालन-पोषण में मां को बहुत अधिक समय देने के साथ काफी प्रयास करना पड़ा है। निचली अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की है। 
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निचली अदालत ने महिला व उसकी तीन नाबालिग बच्चियों के खर्च के लिए छह हजार रुपये मासिक देने का निर्देश उसके पति को दिया था। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने फैसले में कहा कि यह कहना गलत होगा कि बच्चों का खर्च उठाने के लिए माता-पिता समान रूप से जिम्मेदार हैं। 
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बच्चों का खर्च उठाने में कामकाजी महिला को भी सहयोग करना चाहिए, लेकिन इस राशि को दंपती के बीच समान रूप से नहीं बांटा जा सकता। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए पति ने कहा कि वह बेरोजगार है और उसकी पत्नी अपना बिजनेस कर काफी पैसा कमाती है। इसलिए बच्चों के खर्च की जिम्मेदारी अकेले उस पर न डाली जाए। 
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हाईकोर्ट ने पति की याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि याची खुद ट्रेवल एजेंसी चलाता था और उसके बैंक खाते में लाखों रुपये के लेन-देन का रिकॉर्ड है, जबकि वह बेरोजगार होने का दावा करता है। 


महिला और उसकी तीन बच्चियों के लिए छह हजार रुपये मासिक की राशि अधिक नहीं है। इसलिए याची यह राशि दे और बकाया का छह सप्ताह के भीतर भुगतान करे। पेश मामले में मुस्लिम शख्स ने एक ईसाई महिला से 28 नवंबर 2004 को शादी की थी, लेकिन 2015 से वह अलग हैं।
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