{"_id":"68d54ba7d39dd056bf0373ae","slug":"wood-traders-did-not-get-relief-from-gst-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-106339-2025-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: लकड़ी कारोबारियों को नहीं मिली जीएसटी से राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: लकड़ी कारोबारियों को नहीं मिली जीएसटी से राहत
सार
शाहदरा स्थित टिंबर इंडस्ट्री के कारोबारियों ने जीएसटी स्लैब में बदलाव के बावजूद 18 प्रतिशत टैक्स जारी रहने पर चिंता जताई। इससे व्यवसाय पर बोझ और उपभोक्ताओं पर महंगाई का असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कारोबारियों ने कहा- जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद भी चुकाना पड़ रहा 18 फीसदी टैक्स
इमारती लकड़ी को लग्जरी फर्नीचर के स्लैब में किया गया शामिल, नहीं मिली जीएसटी से राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। शाहदरा स्थित टिंबर इंड्रस्ट्री के लकड़ी कारोबारी जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद भी राहत से वंचित हैं। कारोबारियों का कहना है कि इमारती लकड़ी को लग्जरी श्रेणी में रखने के कारण उन्हें अब भी 18 प्रतिशत जीएसटी चुकानी पड़ रही है जिससे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। साथ ही आम उपभोक्ता को भी महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी समस्याओं पर बृहस्पतिवार को आयोजित हुए संवाद कार्यक्रम में टिंबर मर्चेंट एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के कारोबारियों ने चर्चा की।
उन्होंने बताया कि एमएसएमई पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर कई फर्जी वेबसाइट सक्रिय हैं जो पैसे लेकर कारोबारियों को ठग रही हैं। मनीष मित्तल, हिमांशु अग्रवाल, सतीश जैन, गौरव बंसल और अन्य कारोबारियों ने बताया कि वैट व्यवस्था के समय इमारती लकड़ी पर केवल 5 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह दर बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। इससे छोटे कारोबारियों पर खासा असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल ग्राहक अनुकूल नहीं हैं, जिस वजह से उनको सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सरकार की ओर से एमएसएमई पोर्टल को इतना जटिल बना दिया गया है जिस वजह से अधिकांश कारोबारी बिना एजेंट के इसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाते है और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। इसके अलावा बरसात के दौरान इंडस्ट्री के अंदर की रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे। इनमें मलबा तो डाल दिया लेकिन मरम्मत नहीं की गई। ऐसे में सड़कों की धूल कार्यालयों में भर जाती है, जिस वजह से काम करने में परेशानी होती है।
विज्ञापन
-- -- --
कारोबारियों से बातचीत
एमटीएनएल का फोन तो बंद हो गया लेकिन इलाके की सड़कों के किनारे खड़े खंभे जाम की समस्या बने हुए हैं। इनको हटाया नहीं गया है। - सुभाष सेंगर
-- -
खंभों पर लगीं लाइटें खराब है या टूटी पड़ी है। ऐसे में इलाके में अंधेरा बना रहता है जिससे महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं। - निखिल गुप्ता
-- -
राठी मिल के पास करीब 100 मीटर में नाला ही नहीं है और जहां है वहां जाम हो गया है। ऐसे में बरसात के समय जलभराव होने से भारी नुकसान होता है। - उमेश कुमार वत्स
-- -
इलाके में बड़े-बड़े पेड़ों की छंटाई न होने से उनकी टहनियां इंड्रस्ट्रियों में जा रही हैं। ऐसे में कारोबारियों को भारी परेशानी हो रही है। - राजेश कुमार जैन
विज्ञापन
इमारती लकड़ी को लग्जरी फर्नीचर के स्लैब में किया गया शामिल, नहीं मिली जीएसटी से राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। शाहदरा स्थित टिंबर इंड्रस्ट्री के लकड़ी कारोबारी जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद भी राहत से वंचित हैं। कारोबारियों का कहना है कि इमारती लकड़ी को लग्जरी श्रेणी में रखने के कारण उन्हें अब भी 18 प्रतिशत जीएसटी चुकानी पड़ रही है जिससे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। साथ ही आम उपभोक्ता को भी महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी समस्याओं पर बृहस्पतिवार को आयोजित हुए संवाद कार्यक्रम में टिंबर मर्चेंट एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के कारोबारियों ने चर्चा की।
उन्होंने बताया कि एमएसएमई पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर कई फर्जी वेबसाइट सक्रिय हैं जो पैसे लेकर कारोबारियों को ठग रही हैं। मनीष मित्तल, हिमांशु अग्रवाल, सतीश जैन, गौरव बंसल और अन्य कारोबारियों ने बताया कि वैट व्यवस्था के समय इमारती लकड़ी पर केवल 5 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह दर बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। इससे छोटे कारोबारियों पर खासा असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल ग्राहक अनुकूल नहीं हैं, जिस वजह से उनको सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सरकार की ओर से एमएसएमई पोर्टल को इतना जटिल बना दिया गया है जिस वजह से अधिकांश कारोबारी बिना एजेंट के इसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाते है और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। इसके अलावा बरसात के दौरान इंडस्ट्री के अंदर की रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे। इनमें मलबा तो डाल दिया लेकिन मरम्मत नहीं की गई। ऐसे में सड़कों की धूल कार्यालयों में भर जाती है, जिस वजह से काम करने में परेशानी होती है।
विज्ञापन
कारोबारियों से बातचीत
एमटीएनएल का फोन तो बंद हो गया लेकिन इलाके की सड़कों के किनारे खड़े खंभे जाम की समस्या बने हुए हैं। इनको हटाया नहीं गया है। - सुभाष सेंगर
खंभों पर लगीं लाइटें खराब है या टूटी पड़ी है। ऐसे में इलाके में अंधेरा बना रहता है जिससे महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं। - निखिल गुप्ता
राठी मिल के पास करीब 100 मीटर में नाला ही नहीं है और जहां है वहां जाम हो गया है। ऐसे में बरसात के समय जलभराव होने से भारी नुकसान होता है। - उमेश कुमार वत्स
इलाके में बड़े-बड़े पेड़ों की छंटाई न होने से उनकी टहनियां इंड्रस्ट्रियों में जा रही हैं। ऐसे में कारोबारियों को भारी परेशानी हो रही है। - राजेश कुमार जैन