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छेड़छाड़ का विरोध किया तो हो गईं टीम से बाहर

Tue, 29 Apr 2014 02:10 AM IST
Updated Tue, 29 Apr 2014 02:10 AM IST
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women footballers protesting against upfa chairman

सच्चाई का साथ देने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी होगी यह उन महिला फुटबालरों ने सपने में भी नहीं सोचा था जो यूपी फुटबाल संघ के कर्ता-धर्ता मोहम्मद शमसुद्दीन के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर न्याय की गुहार लगा रही थीं।

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नेशनल वूमेन चैंपियनशिप के कैंप में शामिल 25 महिला फुटबालरों को यूपी की टीम में इस वजह से शामिल नहीं किया गया, क्योंकि उन्होंने छेड़छाड़ की शिकार अपनी साथी के लिए आवाज उठाई।
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हैरानी तो इस बात की है कि दादागिरी की हदें पार कर जाने के बावजूद ऑल इंडिया फुटबाल फेडरेशन चुप्पी साधे बैठा है।

'साहब चुनाव में व्यस्त हैं'

women footballers protesting against upfa chairman

इन लड़कियों ने एआईएफएफ से शमसुद्दीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई लेकिन कार्रवाई तो छोड़िए, टीम से बाहर होकर लड़कियों का भविष्य ही दांव पर लग गया है। चयन प्रक्रिया में इतने बड़े हस्तक्षेप के बावजूद एआईएफएफ चुप है।

नाम नहीं छापने की शर्त पर अपनी व्यथा बताने वाली एक महिला फुटबालर ने खुलासा किया कि उन्होंने किस-किसके पास चयन की गुहार नहीं लगाई।

सबसे पहले टीम में नहीं चुने जाने की बात उन्होंने बनारस के जिला खेल अधिकारी से की। उन्होंने डीएम से मिलने को कहा। वहां उन्हें जवाब मिला साहब चुनाव में व्यस्त हैं। एक दिन 'आप' नेता मनीष सिसोदिया भी उनसे मिले। उनकी यही मांग थी कि चयन में गड़बड़ी नहीं हो।

कोच ने कहा, धरना कर लें या प्रैक्टिस

women footballers protesting against upfa chairman

आसाम में जो टीम भेजी गई है वह नए सिरे से चुनी गई है। मंगलवार को यही टीम नेशनल में आगाज करेगी। टीम के कोच भैरव दत्त स्वीकार करते हैं कि नई टीम को चुना गया है। उनका तर्क है कि लड़कियां या तो धरना प्रदर्शन कर लेतीं या फिर प्रैक्टिस।

इंटर डिस्ट्रिक्ट में दिखाए प्रदर्शन के आधार पर राज्य भर से 85 लड़कियां ली गई थीं। इनमें से 25 का चयन कैंप के लिए किया गया। लेकिन इन्होंने अनुशासन भंग किया है। इस वजह से उन्हें बाहर किया गया।

एआईएफएफ के सेक्रेटरी जनरल कुशल दास का कहना है कि मामले में पुलिस जांच कर रही है। वह ऐसे में कुछ नहीं कर सकते जो भी देखना है एक्जीक्यूटिव कमेटी देखेगी।

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