फोन स्क्रीन टच करते ही आपके पास पहुंचेगी पुलिस
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अब पुलिस कंट्रोल रूम को 100 नंबर को छोड़िए और स्मार्ट फोन पर स्क्रीन टच करते ही पुलिस कुछ ही पलों में आपके पास पहुंच जाएगी। आपको ये भी बताने की जरूरत नहीं है कि आपके साथ किस जगह पर वारदात हुई है।
जी हां ये कोई सपना नहीं है बल्कि हकीकत है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद खुद को हाईटेक करते हुए दिल्ली पुलिस ई-साथी ऐप लाई है।
इसके लिए लोगों को ई-साथी ऐप लोड करने की जरूरत होगी। दक्षिण-पूर्व जिले में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर ये प्रोजेक्ट चल रहा है। ट्रायल में ये प्रोजेक्ट सफल होता दिख रहा है।
कार्रवाई नहीं होगी तब तक कॉल पेंडिंग ही शो होगी
दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के जरिए पुलिस का पीड़ित केपास पहुंचने का समय बहुत कम हो जाएगा।
साथ में जब कॉल पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक कॉल पेंडिंग ही शो होगी। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार कोई घटना होने पर पीड़ित 100 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करता था।
ये कॉल पहले आईटीओ स्थित पुलिस हैडक्वार्टर के कंट्रोल रूम में जाती थी। कंट्रोल इसे संबंधित जिले के कंट्रोल रूम को ट्रांसफर करता था। जिला कंट्रोल रूम इस कॉल को संबंधित थानाध्यक्ष को और थानाध्यक्ष एमरजेंसी अफसर को देता था।
इस ऐप में पुलिस असिस्टेंट का ऑप्सन है
इस कॉल ट्रांसफर में कई बार 20 से 30 मिनट तक का समय लग जाता था। नए सिस्टम में ऐसा नहीं है। आपको ई-साथी ऐप लोड करने की जरूरत है। इस ऐप में पुलिस असिस्टेंट का ऑप्सन है।
मान लो आप कनॉट प्लेस में है और उसकेसाथ कोई वारदात हो जाती है तो आप पुलिस असिस्टेंट के ऑप्सन पर क्लिक कर दीजिए। क्लिक करते हुए कनॉट प्लेस के डिवीजन अफसर व कनॉट प्लेस के थानाध्यक्ष के पास ये सूचना और आपकी लोकेशन पहुंच जाएगी।
डिवीजन अफसर कनॉट प्लेस में ही होगा और वह तुरंत आपके पास पहुंच जाएगा। अगर डिवीजन अफसर कहीं जाता है तो वह अपने डिवीजन में रहने वाले जूनियर अफसर को डिवीजन का फोन देकर जाएगा।
हर थाने को छह डिवीजन में बांटा गया है
डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा ने बताया कि हर थाने को छह डिवीजन में बांटा गया है। दक्षिण-पूर्व जिले में कुछ 17 थाने हैं। इस हिसाब से पूरे जिले में 102 डिवीजन बनाए गए हैं।
डिवीजन का इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर को बनाया गया है। हर सब-इंस्पेक्टर को आधुनिक फोन दिया गया है। जैसे ही पीड़ित फोन करेगा संबंधित इलाकेकेडिजीवन अफसर के पास तुरंत कॉल पहुंच जाएगी।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार जब तक संबंधित डिवीजन अफसर व थानाध्यक्ष कॉल पर कार्रवाई नहीं करेंगे, कॉल पेंडिंग रहेगी। इससे आसानी से ये पता लग जाएगा कि कॉल पर कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में सीनियर अफसर आसानी से नजर रख सकेंगे। इसके अलावा इस ऐप पर किसी क्राइम की फोटो भी भेज सकते हैं। किराएदार के वेरीफिकेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।