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तिहाड़ में महिला कैदियों के साथ कैद हैं निर्दोष बच्चे

Thu, 09 Jul 2015 07:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Jul 2015 07:33 PM IST
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With women prisoners in innocent children also in the prison at Tihar.

तिहाड़ जेल में विचाराधीन व सजा पाई महिला कैदी दयनीय हालत में रह रही हैं। इनमें से कई की जमानत हो चुकी है, लेकिन तय शर्तों को पूरा न करने के कारण वे बाहर नहीं आ पा रही हैं।

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इतना ही नहीं महिला कैदियों के बच्चे भी बिना किसी अपराध के अपनी मां के साथ रहने को मजबूर हैं। जेल में बंद 614 महिला कैदियों ने सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिखकर अपना दुखड़ा रोया है।
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अब हाईकोर्ट ने इन महिलाओं की समस्याओं को लेकर संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई का निर्णय किया है। मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस मामले पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी।
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दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय के जज कुरियन जोसफ ने महिलाओं के पत्र को आधार पर उनकी समस्याओं पर सुनवाई करने के लिए पत्र लिखकर सुनवाई का निर्देश दिया है।

जेल में 27 विदेशी महिला कैदी

With women prisoners in innocent children also in the prison at Tihar.

उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और हाईकोर्ट की खंडपीठ कानून के तहत इन महिलाओं को न्याय दिलवाए। इतना ही नहीं, उन्होंने हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश को व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया है।

तिहाड़ जेल छह में बंद इन महिला कैदियों ने कई अहम मुद्दों को उठाया है। महिला कैदियों ने कहा है कि इस जेल में मात्र 400 कैदियों को रखने की व्यवस्था है, लेकिन वर्तमान में 600 से ज्यादा महिला कैदी व करीब 30 से 40 उनके बच्चे रह रहे हैं।

जेल में 234 सजा पाई महिला कैदी, 412 विचाराधीन हैं। महिलाओं में 27 विदेशी महिला कैदी है। पत्र में कहा गया है कि तय नियमों के तहत छह वर्ष से अधिक आयु के बच्चे को मां के साथ जेल में नहीं रखा जा सकता लेकिन कई बच्चों की आयु काफी अधिक हो गई।

इसके अलावा बच्चों को जेल में कुख्यात महिला कैदियों के संरक्षण के रखा जा रहा है। काफी महिला कैदी अपने मामले के निपटारे के इंतजार में हैं।

डॉक्टर भी नहीं दिखाते सहानुभूति

With women prisoners in innocent children also in the prison at Tihar.

इसी प्रकार कई महिलाओं को जमानत मिल चुकी है, लेकिन किन्हीं कारणों से शर्तें पूरी न करने के कारण वे जेल में हैं जबकि उन्हें व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा किया जाना चाहिए।

महिला कैदियों ने कहा कि अदालत व अस्पताल में डॉक्टर भी उनके प्रति सहानुभूति नहीं दिखाते, जेल में उचित कानूनी सहायता भी नहीं मिल पा रही। ऐसे में उनको उचित कानूनी सहायता प्रदान करवाई जाए।

इन महिला कैदियों ने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व अन्य सभी जजों, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व सभी जजों के अलावा उपराज्यपाल, कानून मंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिया लेकिन जज कुरियन जोसफ ने भी उनकी पुकार सुन ली।

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