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Delhi: वन्य जीव प्रेमी चिड़ियाघर में देख सकेंगे दुर्लभ प्रजाति का चिंकारा, जयपुर से लाया गया जोड़ा
Sun, 14 May 2023 02:25 PM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 14 May 2023 02:25 PM IST
सार
चिड़ियाघर में आने वाले दर्शकों के बीच में अन्य वन्य जीवों की तरह चिंकारा भी आकर्षक का केंद्र रहते हैं। यहां आने वाले नए जानवरों के लिए बाड़े भी तैयार किए गए हैं।
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चिड़ियाघर में जयपुर से लाया गया दुर्लभ प्रजाति का चिंकारा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वन्य जीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। चिड़ियाघर में दुर्लभ प्रजाति के चिंकारा का जोड़ा जयपुर से लाया गया है। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत चिंकारा यहां लाया गया है। अब यहां चार मादा और एक नर चिंकारा हो गए हैं। साथ ही, दिल्ली चिड़ियाघर से जयपुर में 15 काकड़ हिरण व दो बारहसिंगा को भेजा गया है। चिंकारा के लिए तैयारियां जोरों से चल रही थी।
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चिड़ियाघर में आने वाले दर्शकों के बीच में अन्य वन्य जीवों की तरह चिंकारा भी आकर्षक का केंद्र रहते हैं। यहां आने वाले नए जानवरों के लिए बाड़े भी तैयार किए गए हैं। चिंकारा आने से चिड़ियाघर का आकर्षण और अधिक बढ़ेगा। जल्द ही और भी वन्य जीवों को यहां लाया जाएगा।
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चिड़ियाघर के रेंज अधिकारी सौरभ वशिष्ठ ने बताया कि इन्हें लाने के लिए लंबे समय से प्रक्रिया चल रही थी। इनके लिए यह मौसम अच्छा रहता है। यह इस समय ज्यादा सक्रिय रहते हैं। चिड़ियाघर में चिंकारा खुद को समायोजित कर सकें इसके लिए उन्हें हर संभव माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कदम के बाद से शहरवासियों को भी इन वन्य जीवों को देखने और व्यवहार समझने का मौका मिलेगा।
ऐसे होते हैं चिंकारा
यह हिरण प्रजाति के शर्मीले जीव होते हैं और इंसानी आबादी से बचकर रहते हैं। बिना पानी के यह लंबे समय तक रह सकते हैं। अमूमन यह अकेला रहना पसंद करते हैं। इनकी ऊंचाई कंधे तक 65 सेमी होती है और वजन 23 किलो तक होता है। गर्मियों में इसकी खाल का रंग लाल-भूरा होता है और पेट व अंदरूनी टांगों का रंग हल्का भूरा व सफेद होता है। सर्दियों में यह रंग और गहरा हो जाता है। सींग 31 सेमी तक लंबे होते हैं। चिंकारा मुख्य रूप से सूखे क्षेत्रों यानी राजस्थान व उसके आसपास के इलाकों में पाए जाते हैं।
ऐसे होते हैं चिंकारा
यह हिरण प्रजाति के शर्मीले जीव होते हैं और इंसानी आबादी से बचकर रहते हैं। बिना पानी के यह लंबे समय तक रह सकते हैं। अमूमन यह अकेला रहना पसंद करते हैं। इनकी ऊंचाई कंधे तक 65 सेमी होती है और वजन 23 किलो तक होता है। गर्मियों में इसकी खाल का रंग लाल-भूरा होता है और पेट व अंदरूनी टांगों का रंग हल्का भूरा व सफेद होता है। सर्दियों में यह रंग और गहरा हो जाता है। सींग 31 सेमी तक लंबे होते हैं। चिंकारा मुख्य रूप से सूखे क्षेत्रों यानी राजस्थान व उसके आसपास के इलाकों में पाए जाते हैं।