ऑटो में शव रखने को मजबूर हुआ पति, अस्पताल ने नहीं दिया एंबुलेंस
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पुलिस के कहने पर अस्पताल प्रशासन ने शव को मोर्चरी से बाहर निकाल दिया। मजबूरी में परिजनों को ऑटो अस्पताल में बुलाकर शव को रखना पड़ा। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इसके बाद परिजनों को शव वाहन दिया गया।
सेक्टर-8 में रहने वाले गोविंद ने बताया कि उसकी पत्नी साबरी देवी को कई दिन से बुखार आ रहा था। शुक्रवार सुबह उसकी तबियत ठीक थी। उसने सुबह उठने के बाद पानी मांगा और इसे पीते ही उसकी मौत हो गई। वे उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टराें ने जांच के बाद साबरी को मृत घोषित कर दिया।
शव को अस्पताल की मोर्चरी में रख दिया गया। गोविंद ने बताया कि इसी दौरान इमरजेंसी के स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची और पंचनामा भरकर शव जल्दी पोस्टमार्टम हाउस ले जाने के लिए कहने लगी।
भीड़ बढ़ती गई, तब मिली एंबुलेंस
परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे, लेकिन पुलिस के दबाव में तैयार हो गए। उनका कहना है कि बिना शव वाहन के ही पुलिस के कहने पर अस्पताल प्रशासन ने दोपहर करीब 12:30 बजे साबरी के शव को मोर्चरी के बाहर निकाल दिया। इसके बाद परिजनों ने ऑटो मंगवाया और शव को उसमें रखा।
गोविंद ने बताया कि पुलिस ऑटो में ही शव को पोस्टमार्टम हाउस लेकर जाने का दबाव बना रही थी। यहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। सीएमएस लखनऊ मीटिंग में गए हुए थे। इस वजह से मामला और बढ़ गया। अस्पताल में भीड़ बढ़ती गई, तब जाकर पीड़ित परिजनों को एंबुलेंस दी गई।
इमजरेंसी ड्यूटी पर तैनात स्टाफ का कहना था कि पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को मोर्चरी से बाहर निकलवाया था। पुलिस ने इमरजेंसी के स्टाफ से शव वाहन नहीं मांगा। जब इमरजेंसी के बाहर भीड़ इकट्ठा हो गई तो अस्पताल प्रशासन को मामले की जानकारी मिली और शव वाहन दिया गया।