जानें क्यों जिंदा बच्चे को मृत बताने वाले मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने को मजबूर हुई सरकार
शालीमार बाग स्थित अस्पताल में तत्काल प्रभाव से ओपीडी सेवाएं बंद
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विस्तार
जिंदा नवजात को मृत बताकर परिजनों को सौंपने के मामले में लापरवाही उजागर होने पर दिल्ली सरकार ने शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इसके साथ ही शनिवार से अस्पताल की ओपीडी सेवाएं बंद हो जाएंगी। सरकार ने यह फैसला जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद किया है।
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक सरकार की तरफ से गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट मिल गई है। इसमें अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर हुई है। वहीं, पहले के दो मामलों को साथ देखने से स्पष्ट होता है कि अस्पताल प्रशासन को सरकारी दिशा निर्देशों की परवाह नहीं है।
ऐसे में सरकार ने तत्काल प्रभाव से लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल की पहली गलती नहीं है। ऐसा करना उसकी आदत में शुमार है। पहले भी उसकी गलतियों के लिए उसे तीन नोटिस भेजे गए थे। उस मामले में भी उसे दोषी पाया गया था।
जैन ने बताया कि शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल के बारे में पिछले महीने में भी शिकायत मिली थी। जांच में पता चला कि अस्पताल प्रशासन ईडब्ल्यूएस कोटे में भी धांधली बरत रहा था। वहीं, डेंगू मरीजों के लिए 10-20 फीसदी तक अतिरिक्त बेड का इंतजाम भी नहीं किया गया था।
मालूम हो कि 1 दिसंबर को एक नवजात को अस्पताल ने मृत बताकर उन्हें सौंप दिया था। श्मशान की तरफ जाने के दौरान मधुबन चौक के पास एक पैकेट में हरकत हुई। पैकेट खोलकर देखा तो लड़के की सांस चल रही थी। परिवार वाले तुरंत बच्चे को लेकर पीतमपुरा के अग्रवाल नर्सिंग होम ले गए।
लाइसेंस रद्द करने के मायने
नए मरीजों को भर्ती करने की नहीं होगी इजाजत
पहले से भर्ती मरीजों को पूर्ववत चलता रहेगा इलाज
कोई मरीज चाहे तो दूसरे अस्पताल में हो सकता है शिफ्ट
डॉक्टर व स्टॉफ पर क्या पड़ेगा असर
अस्पताल के डॉक्टर व स्टाफ पर कार्रवाई की जिम्मेदारी मैक्स प्रशासन पर
सरकार इस मामले में नहीं देगी दखल
अगर किसी डॉक्टर की लापरवाही सामने आएगी तो डीएमए व आईएमए करेगा उसकी जांच
सरकार की निजी अस्पतालों के आंतरिक प्रशासन में दखलंदाजी करने की कोई मंशा नहीं है। फिर भी कोई अस्पताल आम लोगों को लूटेगा या इस तरह की आपराधिक लापरवाही बरतेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री दिल्ली
सरकारी कार्रवाई बेहद कठोर है। हमें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया। किसी एक व्यक्ति का फैसला गलत है तो इससे पूरे अस्पताल को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। इस फैसले के खिलाफ सभी संभव विकल्पों का विचार किया जा रहा है। -मैक्स अस्पताल प्रबंधन
मैक्स अस्पताल के खिलाफ इन मामलों में हुई कार्रवाई
1. जिंदा बच्चे का मृत बताकर परिजनों को सौंपना
-गत 30 नवंबर को पश्चिमी दिल्ली स्थित निहाल विहार की एक गर्भवती महिला ने मैक्स हॉस्पिटल में दो प्री-मेच्योर बच्चों का जन्म दिया था। इसमें से एक मृत था, जबकि दूसरे जिंदा बच्चे को भी मृत बताकर अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सौंप दिया।
रास्ते में नवजात के शरीर में हरकत होने से उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डाक्टरों ने इसे जिंदा बताया। हालांकि, 6 दिसंबर को इलाज के दौरान दूसरे बच्चे की भी मौत हो गई।
-मामले की जांच के लिए एक दिसंबर को दिल्ली सरकार ने जांच कमेटी का गठन किया। पांच दिसंबर को कमेटी की प्राथमिक रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन को दोषी पाया गया था। वहीं, शुक्रवार को फाइनल रिपोर्ट में लापरहवाही पुख्ता हो गई।
2. बेड़ बढ़ाने के आदेश की अनदेखी करना
सरकार ने अस्पताल प्रशासन को 10-20 फीसदी बेड बढ़ाने का आदेश दिया था। लेकिन नियत तारीख बीत जाने के बाद भी अस्पताल ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया।
3. ईडब्ल्यूएस कोटे में लापरवाही
मैक्स हॉस्पिटल के बारे में ईडब्ल्यूएस कोटे के मरीजों के इलाज में भी लापरवाही की शिकायतें मिली थी। सरकार ने इस बारे में अस्पताल प्रशासन को कारण बताओ नोटिस दिया था। सरकार तीनों मामलों को एक साथ देख रही है, जिससे साबित होता है कि अस्पताल प्रशासन सरकारी नियम कायदों की अनदेखी कर रहा है।
सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी लापरवाही: केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि मैक्स अस्पताल में जिंदा बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। यह पूरी तरह आपराधिक लापरवाही का मामला बनता है। इससे पहले भी इस अस्पताल के खिलाफ शिकायतें मिली थी। सभी मामलों को देखते हुए सरकार ने लाइसेंस रद्द कर दिया है।
दिल्ली सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य के मामले के प्रति बेहद संवेदनशील है। सरकार सरकारी अस्पतालों को भी ठीक कर रही है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों के आंतरिक प्रशासन में दखलंदाजी करने की कोई मंशा सरकार की नहीं है। लेकिन कोई अस्पताल आम लोगों को लूटेगा या इस तरह की आपराधिक लापरवाही बरतेगा तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मैक्स प्रबंधन ने पक्ष न सुनने का किया दावा
मैक्स प्रबंधन ने सरकारी कार्रवाई को गलत बताया है। प्रबंधन ने माना कि उसे लाइसेंस को रद्द करने का नोटिस मिल गया है। साथ ही उसका कहना है कि इस मामले में सरकारी कार्रवाई बेहद कठोर है। मैक्स प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका सरकार ने नहीं दिया।
प्रबंधन के मुताबिक, अगर किसी एक व्यक्ति का फैसला गलत है तो इससे पूरे अस्पताल को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। इससे मरीजों के इलाज में बाधा आएगी। प्रबंधन इस फैसले के खिलाफ सभी संभव विकल्पों पर विचार कर रहा है।
फिलहाल अस्पताल के ओपीडी में रोजाना करीब 2000 मरीज इलाज के लिए आते हैं। वहीं, इंडोर में करीब 800 मरीजों को इलाज चल रहा है। इसमें से ज्यादातर मरीज हरियाणा समेत पश्चिमी व उत्तरी दिल्ली के होते हैं।