AAP में इसलिए हुआ घमासान: मुस्लिम मतदाताओं ने ऐसे बिगाड़ा केजरीवाल का खेल
नई दिल्ली, 04 मई
आप में इसलिए हुआ घमासान:::
नोट: ये खबर 2 मई को भी भेजी गई थी, इसमें थोड़ा बदलाव के साथ फिर भेज रहा हूं
आप में इसलिए हुआ घमासान:::
एमसीडी की जगह विस चुनाव होते तो आप जीतती बस सात सीटें
-कांग्रेस और आप के वोट गठजोड़ में 63 सीटों पर मिली है भाजपा को हार
-एमसीडी चुनाव परिणाम के आंकड़े बताते हैं कि 7 विस में आप और 5 में कांग्रेस को मिले हैं विजयी वोट
-कांग्रेस और आप को मिली सभी एक दर्जन सीटें मुस्लिम बहुल
-मुस्लिम मतदाताओं का भरोसा जीतने की कांग्रेस की रहेगी कोशिश
विस्तार
वो भी मुस्लिम बहुल या दलित मतदाताओं की ताकत वाली सीटों पर इज्जत बची है। कांग्रेस के पांच विधायक बनते जिसमें 4 मुस्लिम बहुल हैं। एमसीडी चुनाव के मत विश्लेषण से यह साफ हुआ है कि विधानसभा के चुनाव होते तो भाजपा को 70 में से 57 सीटों पर जीत मिलती।
हालांकि कांग्रेस और आप के वोट जोड़ लें तो भाजपा को केवल सात विधानसभा सीटों पर जीतती। गांधी नगर, विश्वास नगर, रोहताश नगर, शकूरबस्ती, रोहिणी, तुगलकाबाद और शालीमार बाग में भाजपा के वोट दोनो पार्टी के वोट पर भारी पड़े हैं।
चुनावी आंकड़ों का विश्लेषक बताते हैं कि मुस्लिम सीटों पर वोट कांग्रेस और आप में बंटे जिससे भाजपा को बड़ी जीत मिली है। नहीं तो 21 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस और आप को जोड़कर 50 फीसदी से ज्यादा समेत 62 सीटों पर भाजपा से ज्यादा वोट मिले।
कांग्रेस की बात करें तो 2015 में 9 फीसदी वोट मिले थे लेकिन इस बार सबसे कम 10 फीसदी वोट नजफगढ़ विधानभा में मिले हैं। नजफगढ़ सीट अन्य के खाते में जाती क्योंकि यहां भाजपा, कांग्रेस और आप को मिलाकर 50 फीसदी वोट मिले हैं जबकि 50 फीसदी अन्य को मिले हैं।
कांग्रेस को तिमारपुर, गांधी नगर, सदर बाजार, हरि नगर, शाहदरा, जंगपुरा, बादली, घोंडा, कस्तूरबा नगर, कालकाजी, मटिया महल और चांदनी चौक में 30 फीसदी से 39 फीसदी तक वोट मिले हैं। आम आदमी पार्टी को 13 सीट पर 30 फीसदी से अधिक वोट समेत 37 सीटों पर 25 फीसदी से ज्यादा वोट आप को मिले हैं।
...तो लवली के साथ भाजपा में गया गांधी नगर को मतदाता
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चतर सिंह का कहना है कि दिल्ली में 16 फीसदी मुस्लिम हैं जो कई सीटों पर फैसला देने की स्थिति में हैं। 32 सीटों पर कांग्रेस को 21 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं, जहां थोड़ा मेहनत करके जीत सकते हैं। मसलन इन सीटों पर कांग्रेस मुस्लिम व दलित सीटों पर फोकस करके वोटबैंक को जीत का विश्वास दिलाएगी।
गांधी नगर विधानसभा के मतदाता कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह लवली के साथ भाजपा में चले गए। एमसीडी चुनाव में यहां कांग्रेस कोई सीट नहीं बचा पाई और साथ में रिकार्ड 50 फीसदी वोट मिले।
इससे पहले 2012 के निगम चुनाव में 40 फीसदी, 2008 विस में 30 फीसदी, 2013 विस में 32 फीसदी, 2015 में 39 फीसदी वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस का वोट प्रतिशत 2012 के निगम चुनाव में 50 फीसदी था, 2008 के विस में 64 फीसदी, 2013 में 48 फीसदी और 2015 (लवली चुनाव नहीं लड़े थे) में 14 फीसदी वोट मिले थे।