जो भी मिसाइल मैन से मिला वो हमेशा के लिए मुरीद हो गया
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श्रेष्ठ इंसान, उत्कृष्ट नागरिक, महान वैज्ञानिक और शानदार राष्ट्रपति रहे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से जो भी मिला वह हमेशा के लिए उनका मुरीद हो गया।
बतौर राष्ट्रपति और उसके बाद भी उनका साइबर सिटी गुड़गांव आना-जाना रहा है। यही कारण है कि उनके निधन से शहर मायूस है। उद्योग, विज्ञान और शिक्षा जगत उनकी मौत से स्तब्ध है।
लोगों के पास शब्द नहीं हैं कि किस प्रकार से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें। बतौर राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मानेसर स्थित मारुति-सुजुकी प्लांट में 25 मई, 2007 को आए थे।
वहां कलाम से मिलने वाले आज भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
कई बार गुड़गांव आए डा. कलाम
उन्होंने कंपनी के विजिटर बुक में अपने यह शब्द ‘टाइम हैज कम टू लॉन्च न्यू मॉडल्स ऑफ मारुति डिजाइनिंग, मारुति डेवलप्स एंड मारुति प्रोड्यूस्ड कार्स कंपटेटिविली फॉर नेशनल एंड इंटरनेशनल मार्केट’ अंकित किए थे।
इससे पहले वह मानेसर स्थित एनएसजी प्रशिक्षण केंद्र में आ चुके थे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम गुड़गांव के सेक्टर-23ए स्थित आईटीएम यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में 10 मार्च, 2011 को आए थे।
इसी दौरान बोहड़काला स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में भी आए थे। यहां उनका दौरा सेंटर के 13वें वार्षिक उत्सव पर हुआ था। वह यहां बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे थे।
16 दिसंबर, 2013 को नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर में आए थे। वह गुड़गांव में जहां भी आए उन्होंने युवाओं में जोश भर दिया। जिस कार्यक्रम में आए युवाओं को उनकी ताकत का एहसास करवाते रहे।
आईटीएम यूनिवर्सिटी में उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि देने वाला बनने का प्रयास करें।