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Delhi NCR News: इधर सोनम वांगचुक अस्पताल में हुए भर्ती, उधर जंतर मंतर पर आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
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-अनशन के 21वें दिन वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया, इससे पहले 28 दिन तक चले आंदोलन में जंतर मंतर पर लोगों की भागीदारी दिख रही थी कम
-18 जुलाई को अस्पताल भेजते ही आंदोलन ने लिया नया मोड़, दोपहर तक भर गया प्रदर्शन स्थल
-दूसरे दिन देश के दूसरे हिस्से से पहुंचने लगे थे समर्थक, सोमवार संसद मार्च के दौरान दिखा असर
-पुलिस की कार्रवाई के बाद भी लोगों का नहीं थम रहा जोश, बृहस्पतिवार भी दिखी लोगों की दिखी भारी भागीदारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। काकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन ने 28वें दिन नया मोड़ ले लिया। 21 दिन से अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद प्रदर्शन स्थल पर भीड़ उमड़ पड़ी। इससे आंदोलन का स्वरूप और दायरा दोनों व्यापक हो गया है, जबकि इससे पहले मौके पर लोगों की भागीदारी सीमित दिखी। इसको लेकर सोनम वांगचुक समेत सीजेपी के कार्यकर्ता बार-बार लोगों से समर्थन की अपील करते हुए भी दिखे थे। दरअसल, नीट परीक्षा में पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से काकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर पर आंदोलन की शुरुआत की थी। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुए आंदोलन का पहला पड़ाव उस वक्त आया, जब 28 जून को भूख हड़ताल पर बैठ गए। लगातार 20 दिनों तक अनशन करने से उनकी सेहत गिरती जा रही थी। वहीं, 20 जुलाई को सीजेपी ने संसद मार्च का आह्वान भी कर रखा था। इसको देखते हुए दिल्ली पुलिस नाटकीय अंदाज में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए अनशन के 21वें दिन 18 जुलाई सुबह सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया। पुलिस से सफेद चादर से ढककर उनको प्रदर्शन स्थल से हटाया। इसकी तस्वीरें सुबह से वायरल हो गईं।
इसी बीच अस्पताल से सोनम वांगचुक का संदेश मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने इस आंदोलन को आजादी का दूसरा आंदोलन करार दिया है। वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता के साथ-साथ, उनके संदेश ने आंदोलन में शामिल लोगों को और अधिक मजबूती प्रदान की है। सोमवार संसद मार्च के दौरान सड़कों पर भी इसका असर दिखा। दिल्ली पुलिस की बैरीकेडिंग, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले भी लोगों को रोक नहीं सके और वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद भवन के दरवाजे तक पहुंचने में कामयाब रहे।
पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद भी लोगों को नहीं थमा उत्साह
सोमवार दिन की कार्रवाई भी लोगों के हौसलों को नहीं तोड़ सकी। शाम जंतर मंतर से प्रदर्शनकारियों का मंच हटा देने के बाद देर रात तक दुबारा वह जंतर मंतर पहुंच गए। मंगलवार को भी लोगों की भारी भीड़ जंतर मंतर पर दिखी। बुधवार व बृहस्पतिवार लुटियंस दिल्ली के ज्यादातर मेट्रो स्टेशन बंद होने के बावजूद हुजुम कम नहीं हुआ। जंतर मंतर के साथ संसद मार्ग, टॉलस्टाय मार्ग, जनपथ पर हर तरफ आंदोलनकारी दिख रहे थे। पूरा इलाका शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मांग के नारे से गूंजता रहा।
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अस्पताल जाने से पहले आंदोलन पड़ा था सुस्त
सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करवाने से पहले आंदोलन सुस्त पड़ा हुआ था। पेपर लीक सरीखे मुद्दे से भावनात्मक जुड़ाव होने के बावजूद जंतर मंतर पर लोगों की भागीदारी बेहद कम दिखी थी। इस दौरान लोगों की संख्या एक हजार भी पार नहीं कर रही थी। इसमें कई बार ऐसा भी हुआ कि प्रदर्शन स्थल तरकीबन खाली दिखता था। इसको लेकर दबी जुबान से सीजेपी पदाधिकारियों ने कई बार चिंता जाहिर की थी।
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-18 जुलाई को अस्पताल भेजते ही आंदोलन ने लिया नया मोड़, दोपहर तक भर गया प्रदर्शन स्थल
-दूसरे दिन देश के दूसरे हिस्से से पहुंचने लगे थे समर्थक, सोमवार संसद मार्च के दौरान दिखा असर
-पुलिस की कार्रवाई के बाद भी लोगों का नहीं थम रहा जोश, बृहस्पतिवार भी दिखी लोगों की दिखी भारी भागीदारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। काकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन ने 28वें दिन नया मोड़ ले लिया। 21 दिन से अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद प्रदर्शन स्थल पर भीड़ उमड़ पड़ी। इससे आंदोलन का स्वरूप और दायरा दोनों व्यापक हो गया है, जबकि इससे पहले मौके पर लोगों की भागीदारी सीमित दिखी। इसको लेकर सोनम वांगचुक समेत सीजेपी के कार्यकर्ता बार-बार लोगों से समर्थन की अपील करते हुए भी दिखे थे। दरअसल, नीट परीक्षा में पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से काकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर पर आंदोलन की शुरुआत की थी। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुए आंदोलन का पहला पड़ाव उस वक्त आया, जब 28 जून को भूख हड़ताल पर बैठ गए। लगातार 20 दिनों तक अनशन करने से उनकी सेहत गिरती जा रही थी। वहीं, 20 जुलाई को सीजेपी ने संसद मार्च का आह्वान भी कर रखा था। इसको देखते हुए दिल्ली पुलिस नाटकीय अंदाज में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए अनशन के 21वें दिन 18 जुलाई सुबह सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया। पुलिस से सफेद चादर से ढककर उनको प्रदर्शन स्थल से हटाया। इसकी तस्वीरें सुबह से वायरल हो गईं।
इसी बीच अस्पताल से सोनम वांगचुक का संदेश मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने इस आंदोलन को आजादी का दूसरा आंदोलन करार दिया है। वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता के साथ-साथ, उनके संदेश ने आंदोलन में शामिल लोगों को और अधिक मजबूती प्रदान की है। सोमवार संसद मार्च के दौरान सड़कों पर भी इसका असर दिखा। दिल्ली पुलिस की बैरीकेडिंग, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले भी लोगों को रोक नहीं सके और वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद भवन के दरवाजे तक पहुंचने में कामयाब रहे।
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पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद भी लोगों को नहीं थमा उत्साह
सोमवार दिन की कार्रवाई भी लोगों के हौसलों को नहीं तोड़ सकी। शाम जंतर मंतर से प्रदर्शनकारियों का मंच हटा देने के बाद देर रात तक दुबारा वह जंतर मंतर पहुंच गए। मंगलवार को भी लोगों की भारी भीड़ जंतर मंतर पर दिखी। बुधवार व बृहस्पतिवार लुटियंस दिल्ली के ज्यादातर मेट्रो स्टेशन बंद होने के बावजूद हुजुम कम नहीं हुआ। जंतर मंतर के साथ संसद मार्ग, टॉलस्टाय मार्ग, जनपथ पर हर तरफ आंदोलनकारी दिख रहे थे। पूरा इलाका शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मांग के नारे से गूंजता रहा।
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अस्पताल जाने से पहले आंदोलन पड़ा था सुस्त
सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करवाने से पहले आंदोलन सुस्त पड़ा हुआ था। पेपर लीक सरीखे मुद्दे से भावनात्मक जुड़ाव होने के बावजूद जंतर मंतर पर लोगों की भागीदारी बेहद कम दिखी थी। इस दौरान लोगों की संख्या एक हजार भी पार नहीं कर रही थी। इसमें कई बार ऐसा भी हुआ कि प्रदर्शन स्थल तरकीबन खाली दिखता था। इसको लेकर दबी जुबान से सीजेपी पदाधिकारियों ने कई बार चिंता जाहिर की थी।