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गाजीपुर लैंडसाइट से कब तक हटेगा पुराना कचरा : एनजीटी
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विभिन्न बिंदुओं पर एनजीटी ने एमसीडी को दिया विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। गाजीपुर लैंडसाइट पर कूड़े के पहाड़ से जुड़े मामले पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। एमसीडी की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने एमसीडी को यह बताने को कहा कि गाजीपुर लैंड साइट से पुराना कचरा कब तक हटेगा। एनजीटी ने रिकार्ड पर लिया कि लैंडफिल साइट पर हर दिन 2400 से 2600 मीट्रिक टन कचरा पहुंचता है जबकि गाजीपुर स्थित अपशिष्ट से ऊर्जा प्लांट में 700 से एक हजार मीट्रिक टन का ही प्रतिदिन निपटारा हो पाता है।
ओखला स्थिति अपशिष्ट से ऊर्जा प्लांट पर जो कचरा जाता था वह भी अप्रैल 2025 के बद बंद हो चुका है। एनजीटी ने कहा कि हर दिन आने वाला ठोस कचरा और इसके निपटारे में भारी अंतर है और इस अंतर को कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का विवरण बताए बिना ही एमसीडी ने पूर्ण निपटान के लिए लक्षित समय-सीमा 2028 बताई गई है। ऐसे में जरूरी है कि एमसीडी हलफनामा दाखिल करके बताए कि पुराना कचरा कब तक और कैसे हटाया जाएगा। यह भी बताया जाए कि इसके लिए अनुदान का इंतजाम कैसे होगा और इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी कौन सी होगी। एनजीटी गाजीपुर लैंडफिल साइट पर आग लगने की घटना का स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा कि एमसीडी जैव-खनन के लिए उपलब्ध संसाधनों, उनके उपयोग, सहायक सामग्री और समेत अन्य जानकारी पेश करने का निर्देश दिया जाता है। एनजीटी ने यह भी पूछा कि लीचेट और वेस्ट के महीनेवार आंकड़े, ट्रकों की संख्या, और निपटान प्रक्रिया के साथ मीथेन गैस को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था क्या है। मामले में आगे की सुनवाई 10 अक्तूबर को होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। गाजीपुर लैंडसाइट पर कूड़े के पहाड़ से जुड़े मामले पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। एमसीडी की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने एमसीडी को यह बताने को कहा कि गाजीपुर लैंड साइट से पुराना कचरा कब तक हटेगा। एनजीटी ने रिकार्ड पर लिया कि लैंडफिल साइट पर हर दिन 2400 से 2600 मीट्रिक टन कचरा पहुंचता है जबकि गाजीपुर स्थित अपशिष्ट से ऊर्जा प्लांट में 700 से एक हजार मीट्रिक टन का ही प्रतिदिन निपटारा हो पाता है।
ओखला स्थिति अपशिष्ट से ऊर्जा प्लांट पर जो कचरा जाता था वह भी अप्रैल 2025 के बद बंद हो चुका है। एनजीटी ने कहा कि हर दिन आने वाला ठोस कचरा और इसके निपटारे में भारी अंतर है और इस अंतर को कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का विवरण बताए बिना ही एमसीडी ने पूर्ण निपटान के लिए लक्षित समय-सीमा 2028 बताई गई है। ऐसे में जरूरी है कि एमसीडी हलफनामा दाखिल करके बताए कि पुराना कचरा कब तक और कैसे हटाया जाएगा। यह भी बताया जाए कि इसके लिए अनुदान का इंतजाम कैसे होगा और इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी कौन सी होगी। एनजीटी गाजीपुर लैंडफिल साइट पर आग लगने की घटना का स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा कि एमसीडी जैव-खनन के लिए उपलब्ध संसाधनों, उनके उपयोग, सहायक सामग्री और समेत अन्य जानकारी पेश करने का निर्देश दिया जाता है। एनजीटी ने यह भी पूछा कि लीचेट और वेस्ट के महीनेवार आंकड़े, ट्रकों की संख्या, और निपटान प्रक्रिया के साथ मीथेन गैस को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था क्या है। मामले में आगे की सुनवाई 10 अक्तूबर को होगी।
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