फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   When panic riots yield Atali.

दंगे की दहशत से कब निकलेगा अटाली

Mon, 15 Jun 2015 03:27 PM IST
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Mon, 15 Jun 2015 03:27 PM IST
विज्ञापन
When panic riots yield Atali.

बीते दिन हुए संघर्ष ने अटाली गांव के दामन में एक दाग लगा दिया। पुलिस प्रशासन के ढीले रवैये के कारण अराजक तत्वों को निरंकुश बना दिया।

विज्ञापन


लिहाजा, वर्षों से एक साथ रह रहे दो समुदाय के बीच धार्मिक स्थल निर्माण का विवाद आगजनी व पथराव में तब्दील हो गया। उस पर भी अब सियासी लोग वोट की मारामारी में जुटे हैं। अल्पसंख्यकों के साथ ही बहुसंख्यकों के भी अधिकांश घरों पर ताले लटके हैं।
विज्ञापन


हालांकि शांति की कोशिश में बहुसंख्यकों ने हाथ बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। अब लोगों को गांव को दंगे की दहशत से निकलने का इंतजार है। 20 दिन बाद भी दंगे की दहशत से करीब आधा गांव खाली है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लोगों को अपना घर-गांव छोड़ कर दूसरे शहर में रिश्तेदारों के घरों को अपना ठिकाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसा सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने किया, ऐसा नहीं है।

अभी भी सुनसान हैं घर

When panic riots yield Atali.

बहुसंख्यक लोग भी दंगे की पीड़ा से परेशान होकर दूसरे गांव व रिश्तेदारों की शरण में हैं। मामला शांत होने के बाद सभी लोगों के गांव लौटने की उम्मीद है। बहुसंख्यक समुदाय के करीब 20 घर सूनसान हैं। अधिकांश घरों में सिर्फ महिलाएं ही काम करती दिखती हैं।

घर पर पिछले बीस दिन से ताला लगा हुआ है। कभी-कभी आकर औरतें सफाई जरूर कर देती हैं। तेजसिंह के भरे-पूरे परिवार में से सिर्फ 70 वर्षीय मां सोना घर पर हैं। सोना इतनी बुजुर्ग हैं कि उससे चला भी नहीं जाता।

घुटने के दर्द ने उनको परेशान कर रखा है। बताया कि घर पर कोई पानी पिलाने वाला भी नहीं है। पड़ोसी के घर से खाना आ जाता है। उसी से गुजारा हो रहा है।

कवायद से नहीं मिले दिल

When panic riots yield Atali.

वीरेंद्र का घर भी बिन आदमी सूना है। तनाव को बढ़ता देख वीरेंद्र और उसके लड़के अपनी रिश्तेदारियों में शरण लिए हुए हैं।

पुलिस के कहर से बचने के लिए अधिकांश परिवार ठोकर खाने को मजबूर हैं। वहीं, दंगे के 20 दिन बाद अब गांव में तनाव का माहौल धीरे-धीरे कम हो रहा है। गलती को मानते हुए बहुसंख्यक अल्पसंख्यकों के मान-मनौव्वल में जुट गए हैं।

शनिवार सुबह मास्टर धर्मवीर, वीरचंद, मोहन, रणजीत सहित अन्य लोग गांव से बाहर अल्पसंख्यक लोगों की कॉलोनी में पहुंचे। उन्होंने लोगों को सुरक्षा देने और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस कवायद से दिल तो नहीं मिले, लेकिन उसकी शुरुआत हो चुकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed