लाहौर बस से आए पड़ोसी, जानिए उन्होंने क्या कहा
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पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर आतंकवादी हमले के बाद वहां से आने वाले हमारे पड़ोसियों ने दो टूक कहा कि हाफिज सईद का बयान बेबुनियाद है और भारत ने पड़ोसी होने का फर्ज निभाया है।
बृहस्पतिवार को अंबेडकर इंटरनेशनल बस टर्मिनल पहुंची बस के यात्रियों ने भारतवासियों की तरफ से प्रकट की गई संवेदना को दिल से स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भारत के व्यवहार से हमें सहारा मिला और लगा कि पड़ोसी हमारे साथ है।
कराची से आई माहिरा कहती हैं कि दुख की इस घड़ी में भारत के नेताओं से लेकर आम आदमी भी पाकिस्तानियों के दर्द में डूबा नजर आया। इस घटना के पीछे जो ताकतें हैं, वे किसी मजहब से नहीं हैं क्योंकि जो लोग बच्चों को निशाना बना सकते हैं, वे किसी भी धर्म की हिफाजत नहीं कर सकते हैं। आज इस घटना से पूरा पाकिस्तान रो रहा है।
जैसा हाल पाकिस्तान में हाल था वैसा हिंदुस्तान में
कराची से आई छात्र माइमोना बताती हैं कि आर्मी स्कूल पर हमले के बाद पाकिस्तान के हर घर में मातम था। हमें पता है कि यही हाल हिंदुस्तान में भी था। हाफिज सईद ने हमले के लिए भारत को दोषी बताते हुए जो बयान दिया है वह बहुत गलत है। क्योंकि यदि हमले केपीछे भारत का हाथ होता तो संसद से लेकर स्कूलों तक मृतकों की याद में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित नहीं होते। हर कोई घटना अफसोस जता रहा था, ऐसे मौके पर सीमाओं की दीवार भी ढह गई।
मोहम्मद अब्दूल बटर कहते हैं कि पेशावर में स्कूली हादसे ने दुनिया को दिखा दिया कि आतंकी किसी के सगे नहीं होते। आतंकी हमले के बाद जिस तरह से भारत ने पड़ोसी होने के नाते दुख के वक्त सहयोग दिया, उसे दुनिया ने देखा है। इस घटना ने दुनिया को सबक भी दिया कि हमें अब आतंक के खिलाफ एकजुट होना होगा।
कराची के इंजीनियर सकीर अमीन कहते हैं कि बेशक दोनों देशों के बीच तल्खी हो, लेकिन भारत मासूम बच्चों को निशाना नहीं बना सकता, क्योंकि दोनों देश बेशक किसी भी मुद्दे पर एक-दूसरे का विरोध करते हों, लेकिन ऐसे हमलों के साजिशकर्ता कभी नहीं हो सकते। ऐसा होता तो हम यहां कभी नहीं आते। मैं परिवार सहित दिल्ली आया हूं और आजादी के साथ घूमूंगा।
हमें यहां आकर जीवन दान मिलेगा
‘मेरे पिता का लीवर खराब हो चुका है। पाकिस्तान में इलाज की गुंजाइश नहीं थी इसलिए जीवनदान की उम्मीद लेकर आए हैं।’ यह कहना है कि लाहौर निवासी शिमायला का। शिमायला के पति मोहम्मद करीम का सर गंगा राम अस्पताल में लीवर ट्रांसप्लांट होना है। वे कहती हैं कि जिंदगी की उम्मीद न होती तो भारत क्यों आते? स्कूल में हुए आंतकी हमले में भारत का हाथ कभी नहीं हो सकता। क्योंकि कोई भी राजनेता मासूम बच्चों को निशाना नहीं बनाते। दुख की घड़ी में भारत के बच्चों से लेकर आम लोग पाकिस्तानी परिवारों केसाथ खड़े हुए, जोकि ऐसे हमलों के साजिशकर्ताओं के मुंह पर तमाचा है।