फिल्म पीके में आपत्तिजनक क्या है: हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि आमिर खान अभिनीत फिल्म पीके में कुछ भी अपमानजनक नहीं है और इन आरोपों में कोई दम नहीं है कि फिल्म हिंदू संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को चोट पहुंचाती है। अदालत ने फिल्म पर रोक लगाने के लिए दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने याचि से पूछा कि फिल्म में आखिर गलत क्या है। हमें लगता है कि फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे अपराधिक मामला बनता हो।
आप हर चीज का बुरा नहीं मान सकते। खंडपीठ ने कहा हमारी नजर में याचिका विचारयोग्य ही नहीं है। खंडपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वे अपना विस्तृत निर्णय बाद में देंगे।
याचिका में कहा गया था फिल्म में हैं आपत्तिजनक दृश्य
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की और से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल संजय जैन ने अदालत को बताया कि उच्चतम न्यायालय पहले ही इसी तरह की एक याचिका खारिज कर चुका है।
उन्होंने कहा कि फिल्म के प्रमाणन के खिलाफ अपील दायर करने का प्रावधान है। खंडपीठ ने उनके तर्क पर कहा कि प्रमाणन के खिलाफ अपील का अधिकार फिल्म निर्माताओं तक सीमित है, यह किसी बाहरी व्यक्ति के लिए नहीं है।
खंडपीठ के समक्ष यह याचिका अजय गौतम ने दायर की थी। याचि ने कहा कि फिल्म पीके में काफी आपत्तिजनक दृश्य है। उन्होंने फिल्म से आपत्तिजनक दृश्यों को हटाने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए फिल्म की सामग्री ने हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।