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डब्ल्यूएफआई को महिला पहलवानों के लिए गाइडलाइंस बनानी चाहिए : हाईकोर्ट
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-ये टिप्पणियां ओलंपियन विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) को देश और खिलाड़ियों खासकर बच्चे के जन्म के बाद खेल में लौटने वाली महिला एथलीट के हितों में संतुलन बनाने के लिए गाइडलाइंस बनानी चाहिए। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अफसोस जताया कि शादी और बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को पीछे हटना पड़ता है, जबकि पुरुष अपने करियर में आगे बढ़ते रहते हैं। कोर्ट ने कहा कि डब्ल्यूएफआई के पास साफ गाइडलाइंस और समय-सीमा होनी चाहिए, वरना नाइंसाफी होती है। ये टिप्पणियां ओलंपियन विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं। फोगाट मैटरनिटी लीव के बाद लौटी हैं और 2026 सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए महिला सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत मांग रही हैं। कोर्ट ने कहा कि वह इस अर्जी पर आदेश जारी करेगा।
फोगाट के वकील ने आरोप लगाया कि डब्ल्यूएफआई जानबूझकर उन्हें निशाना बना रहा और मनमाना रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा कि सिलेक्शन क्राइटेरिया के बारे में सिर्फ 7 सितंबर को बताया गया, जबकि ट्रायल 14 सितंबर को होने हैं। डब्ल्यूएफआई के वकील ने कहा कि फोगाट को रोका नहीं गया है। अगर वे नीति के अनुसार योग्य हैं तो ट्रायल में हिस्सा ले सकती हैं। उन्होंने बताया कि अन्य महिला रेसलर भी बच्चे के जन्म के बाद वापस आती हैं, फिट हो जाती हैं और मेडल जीतती हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि समस्या यही है। महिला शादी करती है, बच्चा जन्म देती है, उस दौरान पुरुष मेडल जीतकर क्वालीफाई कर लेते हैं, जबकि महिला घर पर बच्चों की देखभाल करती है। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि आपको ऐसे नियम बनाने होंगे जो देश और खिलाड़ी दोनों के हितों में संतुलन रखें।
फोगाट ने डब्ल्यूएफआई के 7 सितंबर के सर्कुलर पर रोक लगाने की भी मांग की है, जिसमें 14 सितंबर को इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल के नियम तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह सर्कुलर मैटरनिटी की वजह से अनुपस्थित रहने वाले एथलीट के लिए कोई विकल्प नहीं देता। इससे पहले 1 सितंबर को हाईकोर्ट ने डब्ल्यूएफआई और केंद्र से महिला एथलीटों के लिए निष्पक्ष ढांचा बनाने पर जवाब मांगा था। फोगाट जुलाई 2025 में मां बनी थीं और अब करियर फिर से शुरू करना चाहती हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) को देश और खिलाड़ियों खासकर बच्चे के जन्म के बाद खेल में लौटने वाली महिला एथलीट के हितों में संतुलन बनाने के लिए गाइडलाइंस बनानी चाहिए। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अफसोस जताया कि शादी और बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को पीछे हटना पड़ता है, जबकि पुरुष अपने करियर में आगे बढ़ते रहते हैं। कोर्ट ने कहा कि डब्ल्यूएफआई के पास साफ गाइडलाइंस और समय-सीमा होनी चाहिए, वरना नाइंसाफी होती है। ये टिप्पणियां ओलंपियन विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई के दौरान आईं। फोगाट मैटरनिटी लीव के बाद लौटी हैं और 2026 सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए महिला सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाजत मांग रही हैं। कोर्ट ने कहा कि वह इस अर्जी पर आदेश जारी करेगा।
फोगाट के वकील ने आरोप लगाया कि डब्ल्यूएफआई जानबूझकर उन्हें निशाना बना रहा और मनमाना रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा कि सिलेक्शन क्राइटेरिया के बारे में सिर्फ 7 सितंबर को बताया गया, जबकि ट्रायल 14 सितंबर को होने हैं। डब्ल्यूएफआई के वकील ने कहा कि फोगाट को रोका नहीं गया है। अगर वे नीति के अनुसार योग्य हैं तो ट्रायल में हिस्सा ले सकती हैं। उन्होंने बताया कि अन्य महिला रेसलर भी बच्चे के जन्म के बाद वापस आती हैं, फिट हो जाती हैं और मेडल जीतती हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि समस्या यही है। महिला शादी करती है, बच्चा जन्म देती है, उस दौरान पुरुष मेडल जीतकर क्वालीफाई कर लेते हैं, जबकि महिला घर पर बच्चों की देखभाल करती है। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि आपको ऐसे नियम बनाने होंगे जो देश और खिलाड़ी दोनों के हितों में संतुलन रखें।
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फोगाट ने डब्ल्यूएफआई के 7 सितंबर के सर्कुलर पर रोक लगाने की भी मांग की है, जिसमें 14 सितंबर को इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल के नियम तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह सर्कुलर मैटरनिटी की वजह से अनुपस्थित रहने वाले एथलीट के लिए कोई विकल्प नहीं देता। इससे पहले 1 सितंबर को हाईकोर्ट ने डब्ल्यूएफआई और केंद्र से महिला एथलीटों के लिए निष्पक्ष ढांचा बनाने पर जवाब मांगा था। फोगाट जुलाई 2025 में मां बनी थीं और अब करियर फिर से शुरू करना चाहती हैं।
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