फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Were examined without treatment, finally broke the back of dengue.

बिना जांच किया महंगा इलाज, डेंगू से तोड़ा दम

Sun, 20 Sep 2015 11:29 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 20 Sep 2015 11:29 AM IST
विज्ञापन
Were examined without treatment, finally broke the back of dengue.

डेंगू के एक मरीज का किसी अन्य बीमारी का एक सप्ताह तक इलाज चलता रहा। मरीज की हालत नाजुक होने के बाद डेंगू की जांच की गई और फिर इलाज शुरू किया गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

विज्ञापन


नतीजा यह हुआ की इलाज के दौरान ही बत्रा अस्पताल में मरीज की मौत हो गई। इस दौरान पीड़ित परिजन के साढ़े तीन लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो गए।

मृतक हरीश (38) के भाई मुकेश चौहान ने बताया कि उल्टी, पेट में दर्द और हल्के फीवर के बाद 11 सितंबर को पटेल नगर स्थित मदन मोहन मालवीय अस्पताल ले गए लेकिन डॉक्टरों ने इंजेक्शन देकर घर जाने की सलाह दे दी।

विज्ञापन

दर-बदर भटकते रहे परिजन

Were examined without treatment, finally broke the back of dengue.

इसके बाद भी सेहत में सुधार नहीं हुआ तब अगले दिन 12 सितंबर को मरीज को सफदरजंग अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया। मरीज को देखने के बाद डॉक्टरों ने उसे स्ट्रेचर पर लेटाकर मेडिसिन वार्ड में शिफ्ट किया।

लेकिन वहां मरीजों की संख्या और एक-एक बिस्तर पर दो से तीन मरीज देखकर हरीश के भाई मुकेश ने कहा कि उसे निजी वार्ड में रेफर कर दिया जाए। लेकिन सफदरजंग अस्पताल में कोई निजी वार्ड नहीं है।

लिहाजा परिजन उसी दिन उसे बत्रा अस्पताल लेकर चले गए। मुकेश ने बताया कि भर्ती करने से पहले 40 हजार रुपये जमा कराए गए इसके तीन बाद एक लाख रुपये जमा कराने के लिए कहा गया।

डेंगू का इलाज करते तो बच जाता हरीश

Were examined without treatment, finally broke the back of dengue.

इस दौरान अस्पताल की दवा दुकान से ही डॉक्टर के कहने पर डेढ़ लाख रुपये से अधिक की दवा लाई गईं। डॉक्टरों ने कहा कि हरीश की किडनी और लिवर में दिक्कत है और संक्रमण हो गया है।

लगातार दवाई देने के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ तब 17 सितंबर को डेंगू का टेस्ट कराया जिसमें उसकी पुष्टि भी हुई। इसके बाद डेंगू का इलाज शुरूकिया गया, लेकिन अगले ही दिन 18 सितंबर को दोपहर करीब एक बजे हरीश की मौत हो गई।

परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद भी डेड बॉडी देने से पहले 64 हजार रुपये जमा कराने के लिए कहा गया और पैसे जमा करने के बाद ही शव को सौंपा गया। मुकेश का कहना है कि यदि समय से डेंगू का इलाज शुरू कर दिया जाता तो हरीश आज जिंदा होते।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed