पानी की बर्बादी बना अपराध, सीएम के आदेश के बाद पानी दुरूपयोग पर धारा 144 लागू
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पानी की बर्बादी को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है। सरकार ने सभी उपायुक्तों को इसे सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन लोगों पर ज्यादा सख्ती की जाएगी जो गाड़ियों की धुलाई, गार्डनिंग और निर्माण कार्यों में पानी का दुरुपयोग कर रहे हैं।
प्रशासन अब गोपनीय तरीके से ऐसे लोगों की सूची तैयार करेगा। निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गर्मी के मौसम के दौरान जिन गांवों में पानी की कमी है उनमें जलापूर्ति सुनिश्चित करवाने के लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा 2000 पानी के टैंकर उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने शुक्रवार को इस बाबत समीक्षा बैठक की और कहा गया कि विशेषतौर पर अप्रैल, मई और जून माह के दौरान राज्य में पानी की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
ताकि जनता गर्मी के दिनों में पानी से वंचित न रहे
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कारों की धुलाई, गार्डनिंग और निर्माण कार्य में प्रयोग करना दंडनीय हो ताकि पेयजल की बर्बादी पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने उपायुक्त से इस प्रावधान को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मुख्यमंत्री ने इस समस्या का समाधान प्राथमिकता से करने को कहा है ताकि जनता गर्मी के दिनों में पानी से वंचित न रहे। उन्होंने इसके लिए जनसहभागिता भी सुनिश्चित करने को कहा है। बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि जहां पानी की समस्या विकराल है वहां नगर निगम टैंकरों से पानी उपलब्ध कराए। निगमायुक्त इस बात को सुनिश्चित करेंगे।
नगर निगम सीमा क्षेत्र की बात करें तो डबुआ कॉलोनी, सैनिक कॉलोनी राहुल कॉलोनी समेत अन्य क्षेत्रों में पानी संकट बरकरार रहता है। यहां गर्मी शुरू होते ही पानी संकट विकराल रूप धारण कर लेता है।
पानी की बर्बादी को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश
पिछले दिनों भी पानी समस्या को लेकर नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन हुए हैं। बात सरकार तक पहुंची तो मुख्यमंत्री ने निगम के टैंकरों से पानी आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पिछले दिनों अमर उजाला ने शहर में पानी की बर्बादी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए जिला प्रशासन और सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया था।
केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा के जरिये समस्या को सरकार तक पहुंचाया। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को पानी की बर्बादी को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
‘प्रशासन अपने स्तर पर ऐसे लोगों पर नजर रखेगा जो पानी का नियमित दुरुपयोग करते हैं। उन लोगों की भी जांच कराई जाएगी जो पानी से कारों व अन्य वाहनों की धुलाई करके व्यवसायिक गतिविधियों में लगे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।’ - गौरव अंतिल, सिटी मजिस्ट्रेट